पट्टी/पृथ्वीगंज बाजार। डाक्टरों की लापरवाही के चलते मासूम को जिंदा दफनाया जा रहा था। सप्ताह भर पूर्व जन्म लेने वाले नवजात को डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। परिजन उसे दफनाने चले गए। कब्र भी खोद ली गई। इस दौरान अचानक नवजात के शरीर में हलचल देखकर परिजनों को शक हुआ। कफन हटाकर देखा तो उसकी पलकें झपक रही थीं। इस पर उसे तत्काल कब्र से निकालकर घर ले आया गया। डाक्टरों ने चेकअप के बाद उसे स्वस्थ बताया।
क्षेत्र के सराय मधई गांव निवासी अशोक पाल की पुत्री ऊषा का विवाह बीते वर्ष संजय पुत्र जोखन निवासी सलाहपुर थाना कादीपुर सुलतानपुर के साथ हुआ था। गर्भवती होने पर वह मायके आ गई थी। सात दिन पूर्व उसने बेटे को जन्म दिया। बीते बुधवार की दोपहर अचानक बच्चे की तबीयत बिगड़ गई और उसकी आंखें पलट र्गइं। हृदय गति भी रुकने लगी थी। जिस पर परिजन उसे दोपहर में सीएचसी लेकर आए।
परिजनों की मानें तो यहां उसे चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। परिजनों के अनुसार इसके बाद भी दो डॉक्टरों को मासूम को दिखाया था। सभी ने उसे मृत बताया। इसके बाद दाउदपुर झील के समीप कब्र खुदवाई गई। शाम को लोग उसे दफनाने ले गए। कब्र में अचानक उसके हिलने पर लोग दंग रह गए। कपड़ा खोलकर देखा तो उसकी पलकें खुली हुई थीं। इस पर लोग उसे घर ले आए। बच्चे के नाना अशोक पाल व मां ने पूछने पर बताया कि तीन डाक्टरों के मृत बताने पर वह उसे दफनाने लाए थे।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. महेन्द्र कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि दिल की धड़कन न मिलने व सांसों के बंद होने पर ही मृत घोषित किया जाता है। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक डॉ. राकेश ने कहा कि उन्होंने उसे मृत घोषित नहीं किया था, बल्कि दिल की धड़कन न मिलने पर उसे रेफर कर कार्डियोलाजी की जांच कराने को कहा था।