कुंडा। छेड़खानी का विरोध करने पर बाइक से रौंदकर छात्रा को मार डालने की घटना को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। गुरुवार को छात्रा का शव आते ही घर में कोहराम मच गया। सुबह मानिकपुर एसओ के साथ ही भारी पुलिस फोर्स पहुंच गई। इसके बाद शव के अंतिम संस्कार की बात आई तो महिलाएं डीएम को मौके पर बुलाने की जिद पर अड़ गईं। सीओ-एसडीएम ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं हुईं। करीब साढ़े 11 बजे चार लाइसेंस पास करवाने के आश्वासन पर शव उठवाया गया।
मानिकपुर थाना क्षेत्र के पूरे हेम गांव निवासी कल्पना पुत्री जगदीश को कियावां गांव निवासी सीटू पुत्र सूबेदार ने छेड़छाड़ का विरोध करने पर बाइक से रौंदकर मार डाला था। इस मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। गुरुवार को सुबह ही छात्रा का शव घर पहुंचा तो परिवार के साथ ही गांव के लोग भी रो पड़े। थोड़ी ही देर में मानिकपुर एसओ प्रमेंद्र सिंह दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद सीओ कबींद्र नारायण, इंस्पेक्टर आरके सिंह चंदेल सहित एसडीएम एके श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे।
जगदीश को समझाने का सिलसिला शुरू हुआ। काफी देर समझाने के बाद वह चार बंदूक के लाइसेंस की बात पर वह मान गया। शव उठाने की बात आई तो महिलाएं आरोपी की गिरफ्तारी पर अड़ गईं। अधिकारियों के साथ ही मानिकपुर एसओ ने काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह मानने को तैयार ही नहीं हो रही थीं। करीब चार घंटे के प्रयास के बाद साढे़ 11 बजे शव उठवाया जा सका। इस दौरान बाबागंज विधायक विनोद सरोज, ब्लाक प्रमुख कालाकांकर बीएन सिंह, जिला पंचायत सदस्य राकेश सरोज सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
छेड़छाड़ के विरोध में की गई छात्रा कल्पना की हत्या के समय गांव की उसकी सहेली आरती भी साथ में थी। घटना के दौरान उसे भी चोटें आई थीं। इस दौरान कल्पना की साइकिल तो टूटी ही आरती की भी साइकिल टूट गई। घटना से सहमे परिजनों ने उसके स्कूल जाने पर रोक लगा दी है। पिता मैकूलाल का कहना है कि बेटी सुरक्षित नहीं है। ऐसे में अभी उसे कोचिंग या स्कूल भेजना ठीक नहीं है।
बुधवार की सुबह हुई इस घटना से पूरा गांव स्तब्ध है। यही नहीं अब स्कूल जाने वाली छात्राओं के सामने समस्या खड़ी हो गई है। परिजन उन्हें अकेले स्कूल भेजने को राजी नहीं हैं। उनका कहना है कि बेटियां घर में रहकर ही पढ़ाई करें। वह बाहर जाने पर सुरक्षित नहीं हैं। उनके साथ कहीं भी और कभी भी घटना घट सकती है। खासतौर से आरती के परिजन तो घटना से सहमे हुए हैं। उसकी साइकिल टूटने से परिवार पर परेशानी का साया है। मैकूलाल मजदूरी के साथ ही थोड़ी बहुत खेती को संभालता है।
ऐसे में उसके पास दूसरी साइकिल के लिए बजट भी नहीं है। उसने बताया कि परिजनों ने साफ तौर पर बेटी को स्कूल जाने से मना कर दिया है। यदि किसी विशेष कार्य के लिए स्कूल जाना होगा तो वह स्वयं उसे लेकर जाएगा। यही हाल पूरे गांव का है। पूरा गांव इस घटना के बाद सशंकित हो गया है।