रानीगंज के मधवापुर बाजार के पास शुक्रवार को हाईटेंशन तार गिरने से बस के जलने की घटना में जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने मजिस्ट्रीरियल जांच के आदेश दिए हैं। रानीगंज एसडीएम को जांच अधिकारी नामित किया गया है। बता दें कि हाईटेंशन तार टूटने से करंट की चपेट में आने से बस का कंडक्टर झुलस गया था। सवारियों ने सूझबूझ का परिचय दिया। जिससे बस में सवार सभी की जान बच गई। जिस वक्त यह हादसा हुआ उस समय बस से सवारियां उतर चुकी थीं। घटना के लिए चालक और परिचालक भी जिम्मेदार थे। उन्होंने लटक रहे हाईटेंशन तार को बांस से ऊपर उठाकर बस निकालने का प्रयास किया था। अचानक तार फिसलकर बस पर जा गिरा था।
सवारियों के विरोध करने पर भी चालक और परिचालक नहीं माने। बस में सवार लोगों ने शायद आने वाले खतरे को भांप लिया था। यही कारण रहा कि लटक रहे तार के नीचे से बस निकालने से पहले सभी लोग उतर गए। शनिवार को अखबारों में छपी खबरों पर डीएम ने संज्ञान में लेते हुए घटना की जांच के आदेश दिए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने इस घटना को पूरी तरह से पचाने का प्रयास किया। जिससे भी पूछा गया उसने टालमटोल किया। यहां तक कि जिलाधिकारी से भी छिपाने का प्रयास अधिकारियों ने किया।
मगर मीडिया ने जिम्मेदार अधिकारियों की पोल खोल कर रख दी। डीएम अमृत त्रिपाठी ने एसडीएम रानीगंज को निर्देश दिया है कि वे घटना से संबंधित सभी पहलुओं की विस्तार से जांच कर आख्या यथा शीघ्र प्रस्तुत करें। चर्चा है कि घटना में बस चालक, कंडक्टर के साथ बिजली विभाग भी दोषी है। मधवापुर के ग्रामीणों का कहना है कि टूटे तार की जानकारी बिजली विभाग के अधिकारियों को दी गई थी। मगर जिम्मेदार लोगों ने तार को जुड़वाने की कोशिश नहीं की। हालांकि बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी इस जिम्मेदारी से बचते नजर आए।