प्रतापगढ़। दिवाली पर शुभ मुहूर्त में ही मां लक्ष्मी और गणेश का पूजन करें। बिना मुहूर्त के पूजन का फल नहीं मिलता है। विधि-विधान से पूजन करने से प्रसन्न होती हैं मां लक्ष्मी। दीपावली के दिन अमावस्या तिथि बुधवार स्वाती एवं विशाखा नक्षत्र एवं सौभाग्य नामक योग है। दिवाली के दिन प्रदोषकाल निशीथकाल महा निशीथ काल स्थिर लग्न एवं चौघड़िया मुहूर्त विशेष रूप से लाभ प्रदान करने वाला होता है।
इस वर्ष की दिवाली में प्रदोष शाम 5 बजकर 26 मिनट से 8 बजकर 11 मिनट तक है। इसी समय अंतराल में वृष लग्न भी सायं 5 बजकर 43 मिनट से 7 बजकर 49 मिनट तक है। साथ ही साथ 7 बजे से 8 बजकर 41 मिनट तक तक शुभ चौघड़िया मुहूर्त है।
सायं 5:26 से 8:41 का समय पूजन के लिए श्रेष्ठ
पंडितों और आचार्यों के मुताबिक 11 नवंबर को दीपावली पर मां लक्ष्मी और गणेश के पूजन के लिए सायं 5 बजकर 26 मिनट से लेकर 8 बजकर 41 मिनट तक का मुहूर्त अत्यंत श्रेष्ठ एवं शुभ है। बलीपुर दुर्गा मंदिर के ज्योतिषाचार्य पं. आलोक मिश्र का कहना है कि इस विशेष मुहूर्त में पूजन करने से सभी की मनोकामना पूरी होगी।
व्यापारियों के लिए शुभ मुहूर्त
निशीथ काल में रात 8 बजकर 11 मिनट से रात 10 बजकर 52 मिनट तक चर लग्न का मुहूर्त होने से यह समय व्यापारियों के पूजन के लिए अति उत्तम है। इस काल में पूजन करने से व्यापार में लाभ होगा। परिवार का कल्याण होगा।
अघोर उपासक मंत्र सिद्धि के पूजन का मुहूर्त
प्रतापगढ़। रात 10 बजकर 51 मिनट से देर रात 1 बजकर 33 तक महानिशीथ काल तथा 12 बजकर 21 से रात 2 बजकर 36 मिनट तक सिंह लग्न का शुभ मुहूर्त रहेगा। परंतु इस काल में अमावस्या तिथि रात 10 बजकर 55 मिनट से समाप्त हो जाएगी। अत: यह मुहूर्त तंत्रमंत्र की सिद्धि अघोर उपासक, ज्योतिषी, कर्म कांड, वेदाध्ययन करने वालों के लिए बेहत शुभ होगा।
बरतें सावधानी, त्योहार पर गम न दे दें पटाखे
तेज आवाज वाले बम से कान को नुकसान होने का खतरा
पटाखों से निकला बारूद आंखों की रोशनी छीन सकता है
प्रतापगढ़। दीपावली पर आतिशबाजी का नजारा पेश करने और देखने वाले लोग जरा संभल कर पटाखा दगाएं। जरा सी असावधानी आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है। अभिभावक छोटे बच्चों को अकेला न छोड़ें। उनके साथ रहकर पटाखा फोड़ें। हो सके तो पटाखे से दूर रहें और सेहत का ख्याल रखें।
दीपावली पर्व जीवन में खुशहाली लाने का प्रतीक है। जीवन में अंधेरा मिटे और प्रकाश का वास हो, इस कामना से इस त्यौहार को मनाना चाहिए। आतिशबाजी से सेहत को खतरा हो सकता है। वहीं प्रदूषण से पर्यावरण को भी खतरा है। पटाखे फोड़ने के शौकीन लोग विशेषकर छोटे बच्चे तनिक भी लापरवाही न बरतें। आतिशबाजी के दौरान केवल रोशन वाले ही पटाखों का इस्तेमाल अधिक करें। कान फोड़ बम से परहेज करें। इस तरह के बम से कान के पर्दे फट सकते हैं।
कान फोड़ बम से फट सकता है कान का पर्दा
प्रतापगढ़। आवाज करने वाले जिन पटाखों की तीव्रता 80 डेसीबल से ऊपर है, उनका इस्तेमाल करने से पहले उससे होने वाले नुकसान के बारे में अच्छी तरह जान लें। नाक, कान और गला विशेषज्ञ सर्जन एके कुलश्रेष्ठ का कहना है कि तेज ध्वनि वाले पटाखे से कान के पर्दे क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। लगातार तेज आवाज वाले पटाखे के बीच खड़े रहने से बहरापन आ सकता है। कान की नसें फट सकती हैं। इससे बहरापन आशिंक और स्थायी दोनो हो सकता है। तेज आवाज वाले पटाखे से लोग दूर रहें।
छिन सकती है आंखों की रोशनी
प्रतापगढ़। बारूद के फटने और लपक से आंखों को खतरा बना रहता है। दोनो ही स्थितियों में अगर बारूद के कण आंख में पड़े तो रोशनी छिन सकती है। नेत्र सर्जन डा. एसके तिवारी का कहना है कि चटाई आदि पटाखे से निकलने वाली जहरीली गैस से आंखों से पानी गिरने लगता है। जो नुकसानदेय है। गैस से सांस लेने में भी तकलीफ होती है। बारूद की लपक से तो एक बार व्यक्ति बच सकता है मगर बारूद सीधे पड़ जाने पर तो पुतली खराब हो सकती है। जिससे रोशनी भी जा सकती है।
बारूद चला गया है तो आंखों को मलें न। बल्कि पानी और दूध से लगातार धोएं। ऐसा करने से बारूद के कण बाहर आ जाते हैं। आराम मिलता है। बिना डॉक्टर की सलाह के बाजार से खरीदा गया कोई भी ड्राप आंखों में न डालें। ऐसा करने से आंखों का खतरा बढ़ सकता है।
बुजुर्गों और बीमारों का रखें ध्यान
पटाखे का शोर बुजुर्गों के लिए बेहद हानिकारक है। अगर आपके घर में बुजुर्ग हैं और वे बीमार हैं तो उनको पटाखे से कोसो दूर रखें। आतिशबाजी के समय घर की खिड़की और दरवाजें बंद रखें। ऐसा न करने से पटाखे की तेज आवाज और जहरीला धुआं उनकी सेहत को खराब कर सकता है। खासकर मरीजों का हार्ट फेल होने का खतरा बढ़ सकता है। दमा के मरीजों के लिए धुआं जहर है। उनका दम घुट सकता है। खासकर अस्पताल और नर्सिंगहोम से दूर ही पटाखें फोड़े जाएं।