प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन पर पानी का संकट बना रहता है। इसके बावजूद भी पानी को बचाने की कोई कोशिश नहीं की जा रही है। जानकर हैरानी होगी कि स्टेशन की वाशिंग लाइन की पाइप में लीकेज की वजह से रोजाना करीब तीस हजार लीटर पानी नालियों में बहकर बर्बाद हो रहा है। इस पानी से हजारों यात्रियों की प्यास बुझ सकती है। पानी की बर्बादी की ओर प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन और लखनऊ डिवीजन के कोई भी अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। पानी जमा होने से ट्रैक जमीन में धंस गया है।
दरअसल, प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन पर वाशिंग लाइन न होने से गाड़ियों की धुलाई और पानी भरने का काम प्लेटफार्म तीन और चार नंबर लाइन पर होता है। यहां पर साप्ताहिक गाड़ी उद्योग नगरी और भोपाल एक्सप्रेस को छोड़ दिया जाए तो डेली चार गाड़ियों पद्मावत एक्सप्रेस, वाराणसी पैसेंजर, लखनऊ पैसेंजर और कानपुर इंटरसिटी में पानी भरने और सफाई का काम वाशिंग लाइन पर होता है। सूत्रों की मानें तो रोज चलने वाली गाड़ियों में औसतन 45 से 55 हजार लीटर पानी भरने और 15 हजार लीटर पानी धुलाई और सफाई के लिए चाहिए। पता चला है कि इसमें से करीब 30 हजार लीटर पानी की बर्बादी रोज हो रही है।
वाशिंग लाइन की पाइप लाइन में लीकेज के चलते इतना सारी पानी ट्रेनों में जाने से पहले नालियों में बह जाता है। लीकेज को बरसाती और कपड़े बांधकर बंद करने का प्रयास रोज किया जाता है। मगर ये ज्यादा देर तक रुक नहीं पाते। वाणिज्य विभाग का अनुमान है कि डेली कम से कम दो से तीन हजार यात्री स्टेशन पर आते हैं। इसमें से जनरल पैसेंजरों की संख्या अधिक होती है जो पानी की बोतल नहीं खरीद सकते। रेलवे स्टेशन के पानी से अपनी प्यास बुझाते हैं। चूंकि स्टेशन पर यात्रियों के पानी के लिए अलग से टंकी नहीं हैं। जिस टंकी का पानी वाशिंग लाइन में जाता है वही पानी प्लेटफार्र्म पर पेयजल की छोटी टंकियों और टोटियों में भी आपूर्ति किया जाता है।