बरसात न होने और नहरों के धोखा देने से सिर्फ धान की फसल ही बर्बाद नहीं हुई है, बल्कि रबी की फसलों का भी बंटाधार हो रहा है। बारिश न होने के कारण खेत सूख गए हैं और उनमें दरारें पड़ गई हैं। ऐसे में दलहन-तिलहन और आलू की बुवाई पर ग्रहण लग गया है। रबी की फसलों की बुवाई के लिए खेत में नमी का होना जरूरी है। नमी न होने के कारण बीज अंकुरित नहीं होंगे। ऐसे में किसानों की मुश्किल बढ़ गई है। उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
पानी के अभाव में धान की फसल सूखने से किसान परेशान थे कि अब उन्हें रबी की फसलों की बुवाई की चिंता सताने लगी है। अक्तूबर माह के प्रथम सप्ताह से ही मटर, चना, सरसों, मसूढ़ आदि की बुवाई प्रारंभ हो जाती हैं, मगर खेतों से नमी गायब होने के कारण अभी तक किसान बुवाई नहीं कर सके हैं। खेतों में नमी की जगह दरारें नजर आ रही हैं। चना, मटर, सरसों की बुवाई का समय बीतता जा रहा है। जिला कृषि अधिकारी डीपी सिंह की मानें तो चना, मटर, सरसों के साथ ही आलू की बुवाई का यह उचित समय है। हालांकि उन्होंने गेहूं की बुवाई के लिए अभी पर्याप्त समय होने की बात कही, मगर किसानों का दुर्भाग्य यह है कि उनके खेत में नमी नहीं है।
किसानों की सिंचाई के साधन नहरें और राजकीय नलकूप पहले ही धोखा दे चुके हैं। अधिकांश नलकूपों से पानी नहीं निकल रहा है। इससे किसानों का खेत खाली पड़ा हुआ है। खेतों से नमी गायब होने के कारण किसान अभी उड़द की कटाई करने के बाद खेतों की जुताई नहीं कर पाए हैं।