किसानों पर कुदरत का कहर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। रबी के सीजन में बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल बर्बाद होने के बाद सदमे से जिले में दर्जनों किसानाें की मौत हुई थी। अब खरीफ के सीजन में भी धान की सूखती फसल देखकर किसान भारी सदमे में हैं। बुधवार को लालगंज तहसील क्षेत्र के पूरे मियां कुंभीआइमा गांव में सूखा धान देखकर किसान रामअधार पाल (40) की सदमे से मौत हो गई। इसकी जानकारी होने पर घर में कोहराम मच गया। प्रधान ने इसकी सूचना तहसील प्रशासन को दी, लेकिन कोई मौके पर नहीं पहुंचा। उल्टे तहसील प्रशासन ने जानकारी से ही इनकार कर दिया।
पूरे मियां कुंभीआइमा निवासी रामअधार पाल ने दो बीघे खेत में धान की फसल लगा रखी थी। बारिश न होने के कारण उसकी फसल सूख रही थी। सिंचाई का एकमात्र साधन नहर थी, लेकिन उसमें भी पानी नहीं आया। इससे वह सिंचाई नहीं कर पाया। इसे लेकर वह काफी परेशान था। वह हर दिन खेत की तरफ जाता था और फसल देखने के बाद उदास होकर घर लौट आता था। बुधवार को भी वह खेत की तरफ गया था। फसल देखने के बाद वह वहीं अचेत होकर गिर गया। यह देख आसपास के लोग भागकर मौके पर पहुंचे।
सूचना पर घरवाले भी आ गए। उसे सांगीपुर सीएचसी ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही मौत हो गई। उसकी मौत से घर में रोना-पीटना मच गया। रामअधार के दो बेटे अमित (12) और सुमित (8) हैं। सबसे बड़ी बेटी की वह शादी कर चुका है। उसकी मौत से अब परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पत्नी राजपति का रो-रो कर बुरा हाल है। उसने बताया कि खेती ही परिवार की आय का स्रोत थी। घर में आजीविका का कोई और साधन नहीं है। उधर, गांव के प्रधान मुश्ताक अहमद ने बताया कि घटना की सूचना तहसील प्रशासन को दी गई थी, लेकिन कोई मौके पर नहीं पहुंचा। एसडीएम लालगंज वाईबी सिंह ने घटना की जानकारी होने से ही इनकार कर दिया।