सोमवार को पितृ विसर्जन के मौके पर लोगों ने पितरों को तर्पण कर आशीर्वाद लिया। विधिविधान से पिंडदान कर लोगों ने पुरखों से आशीष मांगा। परंपरा के अनुसार लोगों ने सोमवार को पितरों को विदा किया। इस मौके पर धूप, नैवेद्य, अगरबत्ती से पूजन हवन का कार्यक्रम हुआ। पूड़ी, खीर और अन्य प्रकार की भोजन सामग्री और हवन डालकर आहुति दी गई। मान्यता है कि यह सब चीजें पूर्वजों तक पहुंच जाती है। ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद उनको दान आदि देकर विदा किया गया। गाय, कौआ, कुत्ता और चींटियों को भी भोजन कराया गया। पंडित रामराज चौबे का कहना है कि ऐसा करने वाला पितरों से आशीर्वाद प्राप्त करता है। उसको मान, सम्मान और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।