पानी के अभाव में किसानों की खेती चरमरा गई है। धान की फसल सूखने के साथ ही रबी के दलहनी और तिलहनी फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है। मानसून ने किसानों से दगा किया तो नहरों ने भी साथ छोड़ दिया। नतीजा, किसान कहीं के नहीं रहे।
जिले में माह भर से बरसात नहीं हुई है। इससे किसानों की फसल चौपट होती जा रही है। खरीफ की प्रमुख फसल धान का उत्पादन काफी प्रभावित हुआ है। धान का कटोरा कहे जाने वाले लालगंज इलाके में फसल सूख रही है। पर्याप्त बिजली नहीं आने से पंपसेट भी धोखा दे गए हैं। लक्ष्मणपुर स्थित बाबूगंज रजबहा, सगरासुन्दरपुर रजबहा, रानीगंज अजगरा नहर, शारदा सहायक, लघु डाल खंड और सिंचाई विभाग की नहरों में पानी नहीं आने से किसान बेहाल हैं। भगवान के भरोसे रहने वाले किसानों की उम्मीद अब टूट गई है। धान की सूखती फसल देखकर किसान काटकर जानवरों को खिला रहे हैं। यह किसी एक गांव या इलाके का हाल नहीं है, बल्कि अधिकांश इलाकों में यह नजारा देखने को मिल रहा है।
अक्तूबर माह के पहले सप्ताह से मटर, चना, आलू, सरसों की बुवाई प्रारंभ हो जाती है। मगर बरसात नहीं होने के कारण खेतों से नमी गायब हैं और किसान बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। सिंचाई विभाग के अधिकारी लक्ष्य के मुताबिक पानी नहीं मिलने के कारण नहरों के सूखा रहने का कारण बता रहे हैं। सहायक अधिशासी अभियंता डीआर पाठक ने बताया कि इस वर्ष जिले को दो सौ क्यूसेट पानी कम मिला है। इसलिए पानी की किल्लत बनी हुई है।