जिले में 0 से 5 वर्ष तक के करीब 26 हजार बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं। खानपान की कमी और सही तरीके से देखभाल न हो पाने के कारण वे कुपोषित की श्रेणी में आ गए हैं। प्रशासन की ओर से पिछले दिनों आयोजित वजन दिवस की रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ है। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने इसकी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भेज दी है। कुपोषण के शिकार बच्चों के इलाज के लिए प्रयास शुरू कर दिया गया है।
सात सितंबर से दस सितंबर तक जिले में वजन दिवस मनाया गया था। इस दौरान आशा कार्यकत्रियों के साथ एएनएम ने बनाए गए केंद्रों के अलावा घर-घर जा कर 0 से 5 वर्ष तक के 3 लाख 234 बच्चों का वजन लिया। जिला कार्यक्रम अधिकारी आरती सिंह की मानें तो जनपद में वजन दिवस के दौरान 26 हजार 780 बच्चों का वजन बहुत ही कम निकला। ये बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी की ओर से स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेज कर कुपोषित बच्चों के बारे में जानकारी दी गई है। साथ ही जिलाधिकारी को भी इसकी रिपोर्ट सौंपी गई है। अब प्रशासन ने ऐसे बच्चों की सेहत सुधारने के लिए प्रयास शुरू कर दिया गया है। बच्चों के इलाज के साथ ही उनके परिवारीजनों को भी जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।