प्रतापगढ़ जिले के कुंडा के प्रधान नन्हे यादव के भाई सुरेश यादव की हत्या को हादसा बताकर सीबीआई द्वारा मामले में लगाई गई फाइनल रिपोर्ट को कोर्ट ने खारिज कर दिया। सीबीआई के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट मनोज कुमार ने सुरेश यादव की मृत्यु को हत्या माना और प्रदेश सरकार के मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया व अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल जी सहित 15 आरोपियों को बलवा, हत्या, हत्या की साजिश व साक्ष्य छिपाने के आरोपों में विचारण के लिए तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई तीन अक्तूबर को होगी।
कोर्ट ने सुरेश यादव की हत्या में रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, गोपाल जी उर्फ अक्षय प्रताप सिंह, जिवेंद्र पाल, तत्कालीन थानाध्यक्ष हथिगवां मनोज कुमार शुक्ला, तत्कालीन थाना प्रभारी कुंडा सर्वेश कुमार मिश्रा, मृतक सीओ कुंडा जियाउल हक के गनर इमरान सिद्दीकी, गुड्डू सिंह, राजीव प्रताप सिंह, संजीव सिंह, नन्हें सिंह, कामता पाल, अजय पाल, विजय पाल, बुल्ले पाल और मुन्ना को आरोपी माना है। मामले में कोर्ट ने कहा कि रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया, अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल जी, जिवेंद्र पाल, संजीव सिंह, गुड्डू सिंह उर्फ संजय प्रताप सिंह और राजीव प्रताप सिंह द्वारा साजिशन षड्यंत्र करके नन्हे सिंह, बुल्ले पाल, मुन्ना, कामता, अजय पाल, विजय पाल से सुरेश यादव की हत्या कराई गई।
इसमें तत्कालीन थानाध्यक्ष हथिगवां मनोज कुमार शुक्ला, तत्कालीन थाना प्रभारी कुंडा सर्वेश कुमार मिश्रा व तत्कालीन सीओ कुंडा जियाउल हक के गनर इमरान सिद्दीकी ने सहयोग किया था। कोर्ट ने आरोपियों को तलब करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट ने अपने कई निर्णयों में कहा है कि कोर्ट का यह कर्तव्य है कि वह असली आरोपियों के खिलाफ संज्ञान ले न कि उन आरोपियों के खिलाफ जिनको पुलिस ने आरोपी बनाकर जेल भेजा हो।
कोर्ट ने कहा कि इस मामले के जो तथ्य सामने आए है उनसे पता चलता है कि गुड्डू सिंह व उसके साथी कई दिन पहले से नन्हे यादव व सुरेश यादव की हत्या के बाबत साजिश रच रहे थे। कोर्ट ने कहा कि दो मार्च 2013 को सभी आरोपियों की आपस में बात करना और राजा भइया की प्रतापगढ़ वाली कोठी पर अक्षय प्रताप सिंह, नन्हें सिंह, संजीव सिंह व जिवेंद्र पाल द्वारा वादी पवन कुमार यादव को बंधक बनाकर दो गलत तहरीर लिखवाने से स्पष्ट है कि मामले की पूरी जानकारी राजा भइया को थी।