बेसिक शिक्षा विभाग के अनुदानित स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति की हरी झंडी मिलते ही कालेज संचालकों ने बोली लगानी शुरू कर दी है। संचालक मुंहमांगी रकम ऐंठने के चक्कर में पड़ गए हैं। तैनाती के लिए सौदा शुरू हो गया है। अधिकांश स्कूलों में पहले से ही आवेदक तय हैं। फिर बाद में विज्ञापन निकालकर प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
जिले में 84 पूर्व माध्यमिक विद्यालय ऐसे हैं, जिन्हें प्रदेश सरकार ने अनुदान दे रखा है। इन स्कूलों में शिक्षकों के 21 पद खाली हैं। जबकि कर्मचारियों के पदों को मृतक आश्रितों से भर दिया गया है। स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए शासन ने प्रबंधकों को अधिकार दिया है कि वह अपने स्तर से योग्य शिक्षकों की तैनाती करें। शासन ने 30 जून तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। शासन की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद कमाई का खेल शुरू हो गया है। अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए लंबी रकम मांगी जा रही है। बीएसए ने दो अखबारों में विज्ञापन कराने का आदेश दिया है, मगर अधिकांश प्रबंधक एक ही अखबार में विज्ञापन कराकर चयन प्रक्रिया पूरी करने में जुटे हैं। कुछ प्रबंधक ऐसे भी हैं जो गैरजनपद के अखबारों में विज्ञापन छपवाकर नियुक्ति की तैयारी में हैं। प्रबंधकों की इस मनमानी की शिकायत बीएसए कार्यालय में भी पहुंचने लगी है। मगर विभागीय अधिकारी स्कूल संचालकों पर कोई कार्रवाई करने में अपने को अक्षम बता रहे हैं। बीएसए एसटी हुसैन ने बताया कि शिक्षकों की नियुक्ति का अधिकार प्रबंधकों को है। उन्होंने बताया कि जो भी शिकायतेें मिल रही हैं। उसकी जांच कराई जा रही है।