यूपी बोर्ड 2015 की परीक्षा में केंद्र बने 195 कॉलेजों के प्रिंसिपलों की लापरवाही के चलते लगभग साढ़े तीन हजार शिक्षकों के पारिश्रमिक का भुगतान नहीं हो पा रहा है। डीआईओएस के कई बार बिल मांगने के बाद भी प्रिंसिपलों ने मुहैया नहीं कराया है। जिससे कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी करने वाले शिक्षकों का भुगतान फंसा है। हालांकि 2015 में बोर्ड उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में लगे परीक्षकों के पारिश्रमिक का भुगतान कर दिया गया है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट 2015 परीक्षा में कक्ष निरीक्षक और केंद्र व्यवस्थापक की जिम्मेदारी का निर्वहन करने वाले प्रधानाचार्यों और शिक्षकों के पारिश्रमिक भुगतान के लिए डीआईओएस कार्यालय को 31 लाख रुपये मिले हुए हैं। वर्ष 2015 की बोर्ड परीक्षा में जिले के 367 कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाया गया था। इनमें से 172 कॉलेजों के प्रिंसिपलों के कक्ष निरीक्षकों और केंद्र व्यवस्थापकों के पारिश्रमिक का बिल कार्यालय भेजते ही उनके खाते में धनराशि भेज दी गई। जबकि जिले के 195 कॉलेजों के प्रिंसिपलों की लापरवाही का आलम यह है कि डीआईओएस के कई बार पत्र लिखने और प्रिंसिपलों की बैठक में बिल मांगने के बाद भी अभी तक कार्यालय को मुहैया नहीं कराया गया है।
इससे लगभग साढ़े तीन हजार शिक्षकों के पारिश्रमिक भुगतान में बाधा खड़ी हो गई है। पटल प्रभारी कौशल किशोर पांडेय ने बताया कि वर्ष 2015 में बोर्ड कॉपियों के मूल्यांकन में लगे परीक्षकों के पारिश्रमिक का भुगतान उनके खाते में कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि जिले के 172 कॉलेजों के कक्ष निरीक्षकों का पारिश्रमिक उनके खाते में भेजने की कार्रवाई अंतिम दौर में है। डीआईओएस शिव कुमार ओझा ने तीन दिन का समय देते हुए कहा है कि जिस कॉलेज से पारिश्रमिक बिल नहीं आएगा, उस कॉलेज के प्रिंसिपल के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी जाएगी।