शहर के चिलबिला स्थित हनुमान मंदिर की जमीन कब्जाने की नीयत से फर्जी खसरा तैयार करने के मामले में कई लोगों के नाम सामने आए हैं। मंदिर समिति ने कूट रचित दस्तावेज तैयार करने का आरोप केन्द्रीय मंत्री कलराज मिश्र के ओएसडी, कौशाम्बी के डिप्टी सीएमओ, एसबीआई बैंक के एक कैशियर आदि पर लगाए हैं। खसरे को लगा कर कोर्ट में वाद दायर कर स्टे प्राप्त कर लिया था। समिति की मांग पर कोर्ट ने सारे दस्तावेज को सील करा दिया।
चिलबिला हनुमान मंदिर इलाहाबाद फैजाबाद हाई-वे किनारे है। मंदिर की बेशकीमती जमीन कब्जा करने की नीयत से कुछ स्थानीय लोगों ने उस पर बालू डंप कर दिया। पुजारी की शिकायत पर डीएम अमृत त्रिपाठी ने हस्तक्षेप किया तो डंप बालू वहां से हटवा दी गई।
हनुमान मंदिर समिति के व्यवस्थापक रोशनलाल ऊमरवैश्य और पुजारी दुर्गा प्रसाद तिवारी आदि ने कहा है कि जमीन न कब्जा कर पाने पर भू-माफिया सक्रिय हो गए। आरोप लगाया कि बजरंग लाल, विष्णुलाल, बृजलाल, गोबिन्द राम, मुकुंद लाल, मकसूदनलाल, केशवलाल, कृष्ण गोपाल, गौरीशंकर आदि ने कूट रचित खसरा तैयार किया। इस खसरे को लगा कर सिविल जज जूनियर डिवीजन की कोर्ट में वाद दायर किए। कोर्ट से उन लोगों ने स्टे प्राप्त कर लिया। यह खबर जब मंदिर समिति को मिली तो वह भूमाफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बताया कि पड़ताल करने पर मालूम चला कि जमीन हड़पने के लिए उन लोगों ने फर्जी खसरा कोर्ट में लगाया है। इस पर समिति के पदाधिकारी त्रिभुवन लाल आदि हाजिर हो कर पूरी जानकारी कोर्ट को दिए। बात जज को पता चली तो आरोप को गंभीरता से लेते हुए मामले से जुड़े खसरे को सील कराने का आदेश पारित कर दिया। आदेश पर खसरा सील कर दिया गया। खसरे की नकल लेकर तहसीलदार सदर से सूचना का अधिकार से यह मांग की गई कि वह खसरा उनके कार्यालय से जारी हुआ है। जवाब में उन्होंने कहा कि खसरा उनके कार्यालय से नहीं जारी हुआ। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि कूट रचित खसरा तैयार करने वालों में शामिल बजरंग लाल जायसवाल, विष्णु जायसवाल स्टेट बैंक में कैशियर पद पर, बीएल जायसवाल कौशाम्बी में डिप्टी सीएमओ पद पर और गोबिंद राम केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र के ओएसडी पद पर तैनात हैं। अन्य आरोपी कारोबार करते हैं। समिति ने यह भी बताया कि पूर्व में भी कुछ लोगों ने मंदिर की जमीन को फर्जी ढंग से बैनामा कराया था। इसमें क्रेता व विक्रेता के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ था। समिति की ओर से सबूत के तौर पर कूटरचित दस्तावेज की प्रतियां भी जारी की गई हैं। पूरे मामले में मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने डीएम से मिल कर कार्रवाई की मांग की है।