करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी गांवों में बने पंचायत भवन अपूर्ण हैं। आधा-अधूरा निर्माण करने के बाद कार्यदायी संस्थाएं गायब हैं। शिकायत के बाद भी इन संस्थाओं के ऊपर कार्रवाई नहीं हो सकी है। ऊंची पहुंच व सेटिंग के दम पर इन संस्थाओं ने पंचायत भवन पूर्ण होने का भुगतान भी करा लिया है। कागजों पर आधे-अधूरे बने पंचायत भवनों को पूर्ण दर्शाकर भुगतान कर पैसे का बंदरबाट कर लिया गया।
विकास खंड बेलखरनाथधाम के अंतर्गत 55 पंचायत भवनों के निर्माण करने का जिम्मा यूपी पीसीएल विभाग को मिला था। विभाग ने कई स्थानों के कार्य अपने चहेते ठेकेदारों को दे दिया। ठेकेदारों ने कहीं दीवार खड़ी कर काम छोड़ दिया तो कहीं छत का लिंटर डालकर आधा-अधूरा काम किया। कुछ स्थानों को छोड़कर अधिकांश जगहों पर अधूरा निर्माण कर विभाग के ठेकेदार लापता हो गए। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी पंचायत भवन का आधा-अधूरा निर्माण होने से वह जनता के किसी काम का नहीं रह गया। अपूर्ण पंचायत भवनों में जानवर बैठ रहे हैं। ग्राम पंचायत सांगापट्टी के कठार गांव में बना पंचायत भवन इसकी बानगी है।
यहां पंचायत भवन में लिंटर कर कार्य अधूरा छोड़कर कार्यदायी संस्था चार साल से गायब है। कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में जिन पंचायत भवनों में गांव की चौपाल व बैठकें होनी थी, वहां जानवर बैठ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इस विकास खंड के लगभग 55 पंचायत भवनों में अधिकांश अपूर्ण हैं। उनके निर्माण को सालों बीत रहे हैं। ग्रामीण सोच रहे हैं कि अब बनेगा, लेकिन इंतजार ही रह गया। सूत्रों की मानें तो विभाग के ठेकेदारों ने सेटिंग व अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर इन पंचायत भवनों को पूर्ण दर्शाकर भुगतान भी करा लिया गया है। जांच के दौरान इसमें लंबा घोटाला सामने आ सकता है। विकास खंड शिवगढ़ में भी बने पंचायत भवन आधे-अधूरे हैं।