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अफसरों की लीला, सूखी धरती कागज गीला

Thu, 13 Aug 2015 11:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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बारिश का हाल यही रहा तो दाल संग भात का स्वाद अबकि भी महंगा ही होगा। बेदम बारिश को लेकर खाद्यान्न कारोबारी व किसान ऐसी ही संभावना जता रहे हैं। उधर प्रशासन व कृषि विभाग बारिश की आंकड़ेबाजी में जुटा है।
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गेहूं की फसल तैयार हुई तो प्रकृति का कहर टूट पड़ा। बेमौसम बारिश व तूफान ने फसल को नष्ट कर दिया। प्रकृति की मार से मिले जख्म को याद कर किसान आज भी सिहर जाते हैं। यह घाव ठीक से भरा भी नहीं कि धान रोपाई के समय भी प्रकृति ने खिलवाड़ कर दिया। कृषि विभाग ने जिले में एक लाख 38 हजार 620 हेक्टेयर में धान रोपाई का लक्ष्य रखा था।

सभी जानते हैं कि नहरों की बदतर दशा व बेदम बारिश के कारण धान की अच्छी रोपाई नहीं हो पाई। मगर इस सच्चाई से विभागीय आंकड़े काफी इतर हैं। कृषि विभाग दावा है कि एक लाख 28 हजार 300 हेक्टेयर में धान की रोपाई हो चुकी है। यह आंकड़ा लक्ष्य के अनुपात में करीब 90 प्रतिशत रोपाई होने का दावा कर रहा है। इन आंकड़ों के बलबूते विभाग धान रोपाई के मामले में अपनी पीठ ठोंक रहा है। यहां यह बताना जरूरी है कि यदि सरकार इन आंकड़ों पर ऐतबार करेगी तो हकीकत में धान रोपाई भले प्रभावित हुई हो पर जिला सूखा घोषित नहीं होगा। इसकी एक वजह यह भी कि तहसीलवार बारिश का जो रिकार्ड तैयार है उसमें बरसात की स्थिति काफी अच्छी है। 31 जुलाई तक 1333 मिलीमीटर बारिश बताई जा रही है। बारिश और नहरों की स्थिति को लेकर खाद्यान्न कारोबारी व किसान सहमे हैं। गल्ला व्यापारी सुरेश जायसवाल व मोहित कुमार अग्रवाल का अनुमान है कि धान की पैदावार का घटना तय है। ऐसे में चावल का दाम आसमान छुएगा।
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