मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य का पर्यवेक्षण करने वालों की गलती का खामियाजा अब अधिकारियों को भुगतना पड़ रहा है। बीएलओ की कारगुजारी देखने वालों को इतनी फुर्सत नहीं मिली कि वे पुनरीक्षण कार्य में प्रपत्रों पर हस्ताक्षर का समय निकाल पाते। इसके चलते बीएलओ मनमानी करते रहे। राज्य निर्वाचन आयोग ने एपिक मतदाता सूची को लेकर गहरी जताई है। सूत्रों की मानें तो राज्य निर्वाचन आयोग ने जिम्मेदार अधिकारियों को ऐसी मतदाता सूची देखने के बाद क्लास भी लगाई। तीन दिन से ऐसे गांवों की मतदाता सूची का मिलान युद्धस्तर पर किया जा रहा है। इसके बाद भी कुछ गांवों की ही सूची सुधारने के बाद पंचायत निर्वाचन कार्यालय भेजा जा रहा है। इसे लेकर अभी भी ब्लाक और तहसील के अधिकारी गांव की बीएलओ को साथ लेकर मतदाता सूची का मिलान कर रहे हैं।
ताकि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा तय की गई गाइड लाइन के अनुरूप मतदाता सूची तैयार की जा सके। विकास भवन, नगरीय निकाय व पंचायत कार्यालय, अंबेडकर चौराहा स्थित कंप्यूटर संस्थान पर मतदाता सूची फीडिंग का कार्य जोरशोर से किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो आज यह नौबत न आती, यदि जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान दिए होते। पर्यवेक्षकों को दस प्रतिशत और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को दो प्रतिशत जांच करनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इतना ही नहीं जिम्मेदारों की लापरवाही से अब मतदाता सूची को लेकर अधिकारियों को दिन-रात एक करना पड़ रहा है। अपर जिलाधिकारी वित्त व राजस्व रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, बीडीओ नोडल अधिकारी, तहसीलदार अतिरिक्त सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, एडीओ पंचायत को सहायक नोडल अधिकारी बनाया गया था, लेकिन विभागीय कार्यों की व्यस्तता के चलते इस ओर किसी का ध्यान ही नहीं गया। इसके चलते गंवई राजनीति का शिकार बीएलओ हो गए और मनमानी मतदाता सूची तैयार कर ब्लाक में जमा करा दिया। बीएलओ की मनमानी का आलम यह है कि गांव में पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं को प्रारूप भरने के बाद कोई प्रपत्र नहीं दिया गया। जबकि सभी को ऐसा प्रारूप उपलब्ध कराया गया था। जिसमें मतदाताओं को एक प्रारूप बीएलओ को देना था, लेकिन ऐसा अधिकांश गांवों में नहीं हो सका।