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जिम्मेदारों के मुंह पर ताला, जलनिगम में भी गड़बड़झाला

Sat, 25 Jul 2015 11:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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जलनिगम में लाखों का घालमेल हुआ है। विभाग से संचालित योजनाएं ठेकेदारों व कुछ अफसरों के लिए कमाई का जरिया बन गई हैं। आरोप है कि मनाही के बावजूद दो लाख से अधिक के कार्यों को अनुबंध के आधार पर चहेते ठेकेदारों के हाथ सौंप दिया गया। जिन्हें यह सारा काम दिया गया, वह दोनों संस्थाएं इलाहाबाद की हैं। यहां हैंडपंपों को लगाने और रिबोर में भी तगड़ा खेल हुआ है। जलनिगम में घोटालों का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को करीब 90 पन्ने का पत्र जांच व कार्रवाई के लिए भेजा है। उसके मुताबिक जलनिगम के अधिशासी अभियंता राजेश खरे शीर्ष अफसरों की मिलीभगत से इस जिले में विगत 21 जनवरी 2003 से तैनात हैं।
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एक ही विभाग में एक ही पद पर 10 वर्ष से नियुक्त खरे का अन्यत्र स्थानांतरण नहीं हुआ। प्रबंध निदेशक जलनिगम के आदेश हैं कि जिस काम की लागत दो लाख से ज्यादा है उसे कराने के लिए समाचार पत्रों में प्रकाशन व टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाए। इस आदेश को रौंदते हुए उन्होंने कोटेशन लेकर चहेते ठेकेदारों के नाम अनुबंध बना दिया। प्रत्येक अनुबंध तीन से आठ लाख रुपये की लागत के हैं। उसका आरोप है कि इस तरह राजेश खरे ने लगभग 50 अनुबंध बनाए। इसमें ज्यादातर अनुबंध पाइप पेयजल योजना के अवर जलाशय पंप हाउस एवं बाउंड्रीवाल मरम्मत से संबंधित हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार इसकी लागत लगभग दो करोड़ रुपये है। अधिशासी अभियंता के जरिए चहेते मात्र दो ठेकेदारों को दिए गए काम की पुष्टि उसके जरिए भेजी गई सूची से होती है। जांच के लिए सीएम को भेजे गए दस्तावेज के मुताबिक पुरानी पाइप पेयजल योजनाओं की मरम्मत एवं रखरखाव कार्य मद में विभाग ने जिले को वित्तीय वर्ष 2012-2013 में 20522500 रुपये वर्ष 2013-2014 में 41398000 रुपये तथा वर्ष 2014-2015 में 10674000 की धनराशि आवंटित की। मनमाने तरीके से फर्जी अनुबंध एवं स्थायी उच्च (टीआई) के माध्यम से बिना कार्य कराए विभागीय खाते से धन का आहरण किया गया। विभागीय सूत्र कहते हैं कि हैंडपंप लगाने व रिबोर में भी लंबा खेल हुआ है।
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