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कामचलाऊ प्रभारी ढो रहे लालगंज कोतवाली का भार

Mon, 20 Jul 2015 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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50 किलोमीटर क्षेत्रफल में फैली स्थानीय कोतवाली के लिए अधिकारियों को आठ माह से एक कोतवाल ढूंढे नहीं मिल रहा है। कामचलाऊ प्रभारियों के कंधे पर कोतवाली का भार ढोने का जिम्मा सौंपकर काम चलाया जा रहा है। अनुभव की कमी से कई बड़ी घटनाओं में पुलिस की फजीहत हो चुकी है। क्षेत्राधिकारी की जिम्मेदारी भी प्रभारी के सहारे चल रही है।   लालगंज कोतवाली में सबसे बड़े थाने के रूप में जाना जाता है। कमौरा तेजगढ़ से लेकर मनीपुर मनुहार तक लगभग 50 किलोमीटर क्षेत्र कोतवाली के अंतर्गत आता है। इसके क्षेत्र में सैकड़ों गांव आते हैं। कोतवाली में दरोगा व सिपाहियों का टोटा पहले से ही है। कहने को तो लीलापुर, कमौरा व रानीगंज कैथौला में चौकी की स्थापना भी की गई है, मगर यहां भी पुलिसकर्मियों की तैनाती नाममात्र की है। साफ है कि रात-दिन कोतवाली क्षेत्र की लाखों जनता की सुरक्षा व गांवों की कानून व्यवस्था संभालने के लिए चंद पुलिस कर्मी ही हैं। इसके बाद भी लालगंज कोतवाली का भार ढोने का जिम्मा महीनों से प्रभारियों के ऊपर है। आठ माह से अधिकारियों को एक अदद कोतवाल नहीं मिल सका है।
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 तत्कालीन एसपी बलिकरन सिंह यादव ने कुछ दिनों तक कोतवाली का प्रभार सभाजीत मिश्र को दिया। गाबी महुआबन में हुए बवाल के बाद सभाजीत को हटाकर दरोगा संजय कुमार शर्मा को जिले की सबसे बड़ी कोतवाली का प्रभारी बना दिया। प्रभारियों की अनुभवहीनता के चलते बीते कई कुछ दिनों में कोतवाली क्षेत्र में जमकर बवाल हुआ। पुलिस की खूब किरकिरी भी देखने को मिली। बवाल की गाज एसपी व लालगंज सीओ पर भी गिरी। इसके बाद भी अधिकारियों को लालगंज में तैनात करने के लिए कोतवाल नहीं मिल सका। सीओ का यहां से तबादला कर कर दिया गया तो सर्किल की जिम्मेदारी कुंडा के सीओ को मिल गई। इससे अब कोतवाली के साथ ही लालगंज सर्किल भी प्रभारी सीओ के कंधों पर आ गई। प्रभारी सीओ साहब कुंडा में बैठकर क्षेत्राधिकारी की औपचारिकता निभा रहे हैं। ऐसे में आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि लालगंज कोतवाली क्षेत्र की सुरक्षा व कानून व्यवस्था भगवान भरोसे ही चल रही है। देखना यह है कि नवागत एसपी अखिलेश कुमार चौरसिया कोतवाल की तलाश पूरी कर पाते हैं या प्रभारी के बलबूते ही व्यवस्था चलाएंगे।
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