विदेशों में प्रतापगढ़ को नई पहचान दिलाने वाले स्व. राजा दिनेश सिंह विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। सदैव सत्ता के नजदीक रहने वाले राजा दिनेश सिंह ने छह बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के सदस्य के रुप में जनता की सेवा की। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू के निजी सचिव के रूप में आठ वर्षो तक रहकर कूटिनीति में महारथ हासिल की। ऐसे महान व्यक्तित्व का रविवार को लालगंज की जनता स्मरण करने के लिए अवधेश विद्या निकेतन इंटरकॉलेज शीतलमऊ में एकत्रित होगी।
पतित पावनी मां गंगा की गोद में स्थापित राजभवन कालाकांकर का इतिहास आज किसी से छुपा नहीं है। स्व. राजा दिनेश सिंह के बाबा राजा राजाराम पाल सिंह ने अंग्रेजों से देश को स्वतंत्र कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। आजादी की लड़ाई में कालाकांकर घराने का अहम भूमिका थी। पूर्वजों से समाज सेवा को सीखने वाले स्व. राजा दिनेश सिंह का जन्म 19 जुलाई 1925 को बेल्हा की धरती पर हुआ था। केपी कॉलेज इलाहाबाद, दून कॉलेज देहरादून और लखनऊ विश्वविद्यालय से शिक्षा अर्जित करने के बाद देश सेवा में कदम रखा। अपनी विलक्षण प्रतिभा के चलते स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू के अत्यन्त करीबी बनना का मौका मिला। स्व. दिनेश सिंह की बुद्धिमत्ता को देखकर पं. नेहरू ने अपना निजी सचिव बनाया। फ्रांस और लंदन के दूतावास में सचिव के रूप में कार्य करने वाले स्व. राजा दिनेश सिंह ने छह बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के सदस्य के रूप में जनता की आवाज बुलंद करते रहे। केंद्र सरकार में गहरी पैठ होने कारण उन्हें महत्वपूर्ण वाणिज्य, उद्योग, मानव संसाधन और विदेश मंत्रालय में कैबिनेट मंत्री के रूप में देश को नई दिशा दी। उन्होंने राउण्ड टेबिल नामक मासिक पत्रिका का सफल प्रकाशन कर देश के लोगों को आगे बढने का मंत्र दिया।