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मकान के मलबे में दबकर मां-बेटी की मौत

Sat, 18 Jul 2015 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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कंधई थाना क्षेत्र के उतरास गांव में शनिवार की भोर करीब चार बजे एक कच्चा मकान भरभरा कर गिर पड़ा। मलबे में दबने से मां व बेटी की मौत हो गई। जबकि बेटे को गंभीर चोटें आईं। गांव के लोगों ने घायलों को स्थानीय अस्पताल ले आए। खबर मिलते ही वहां अधिकारियों का जमावड़ा लग गया। उतरास गांव निवासी रामआसरे गुप्त शुक्रवार की रात खाना खाने के बाद पत्नी सुषमा (32) बेटी काजल (10) व बेटा आनंद (6) के साथ अपने कच्चे मकान में सो रहा था। भोर में करीब चार बजे उसकी नींद खुली तो बेटा आनंद लघुशंका के लिए कहने लगा।
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रामआसरे उसे लेकर बाहर आया थोड़ी देर बाद बेटे को दरवाजे पर छोड़ कर खुद शौच जाने की तैयारी करने लगा। इसी बीच मकान भरभरा कर गिर पड़ा। घर के अंदर सो रही उसकी पत्नी व बेटी और बेटा मलबे में दब गए। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला और इलाज के लिए स्थानीय स्वास्थ्य केन्द्र ले गए। वहां डॉक्टरों ने सुषमा और काजल को मृत घोषित कर दिया। जबकि आनंद की हालत नाजुक देख उसे भर्ती कर लिया। घटना की जानकारी होने के तत्काल बाद एसडीएम पट्टी, सीओ पट्टी, एसओ कंधई, हल्का लेखपाल के साथ कानूनगो व तहसीलदार मौके पर पहुंचे। इलाकाई पुलिस मां-बेटी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दी। हादसे से परिवार के बचे हुए लोगों में कोहराम है। हादसे की वजह से पूरे गांव में सन्नाटे का माहौल है।  

उतरास गांव निवासी रामआसरे गुप्त के पास दो बेटे लकी व आनंद और एक बेटी बेटी काजल का हंसता खेलता परिवार था। उसकी गरीबी भरी जिंदगी की खुशी को किसी की ऐसी नजर लगी कि वह सदा के लिए आंसूओं में डूब गया। गिरे मकान के मलवे में पत्नी और बेटी की मौत हो गई। ईश्वर की कृपा ही थी कि पुत्र आनंद लघुशंका के लिए उठ गया और वह लौटने के बाद शौच जाने की तैयारी करने लगा व उसका बड़ा बेटा लकी दादा के पास सो रहा था। वर्ना रामआसरे के कुल का अस्तित्व ही खत्म हो जाता।
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हादसे के बाद एसडीएम पट्टी मौके पर पहुंचे तो परिजनों संग घटना स्थल पर जमे कुछ ग्रामीणों ने नाराजगी व्यक्त की। कहना था कि रामआसरे आवास की मांग कर रहा था तब किसी ने उसकी बात नहीं सुनी। आज अब उसका परिवार उजड़ गया तो वे क्यों आए हैं। इस सवाल को लेकर लोगों का आक्रोश फूटता कि बुजुर्गों के समझाने पर सभी शांत हो गए, पर अफसरों को मृतकों के परिजन सहित गांव के लोग भी बद्दुआ देते रहे।
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