जिले के वित्तविहीन हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में तैनात शिक्षकों के मानदेय भुगतान में पांच साल सेवा की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। प्रमुख सचिव की मौजूदगी में हुई बैठक में शिक्षकों की तैनाती में आरक्षण लागू होने की बाध्यता खत्म कर दी गई है। इससे स्कूलों में तैनात सभी शिक्षकों को मानदेय की आशा जगी है। वित्तविहीन मान्यता प्राप्त और अशासकीय माध्यमिक कॉलेजों में अंशकालिक अध्यापकों को मानदेय भुगतान के लिए 9 जुलाई को हुई बैठक में कार्यरत अध्यापकों की सेवा संबंधी पांच साल की सेवा को समाप्त कर दिया गया है।
शिक्षकों की तैनाती में आरक्षण की बाध्यता भी समाप्त कर दी गई है। इससे जिले के वित्तविहीन स्कूलों में तैनात लगभग बारह हजार शिक्षकों को मानदेय मिलने की आशा जग गई है। शासन के पुराने मानक पर लगभग आधे की संख्या में शिक्षक मानदेय की दौड़ से बाहर हो गए थे। शासन के इस फैसले की वित्तविहीन प्रबंधक महासभा के जिलाध्यक्ष गंगाप्रसाद पांडेय ने शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी और प्रबंधक महासभा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार त्रिपाठी के प्रयास के सराहना की है। उन्होंने कहाकि इन शिक्षक नेताओं के प्रयास से अब सभी वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय मिलने की आशा जगी है।