लोकसभा चुनाव की बिसात भले ही नई हो, लेकिन राजनैतिक दलों ने पुराने मोहरों पर ही दांव लगाया है। कांग्रेस और जनसत्ता दल ने जहां पूर्व सांसदों को टिकट दिया है, वहीं भाजपा और सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी भी विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। इनमें भाजपा प्रत्याशी जहां सदर से विधायक हैं तो बसपा प्रत्याशी को 2017 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। किसी भी दल ने नए चेहरे पर दांव लगाने का साहस नहीं दिखाया।
लोकसभा चुनाव में जिले में विकास के मुद्दे पूरी तरह गायब हैं। जाति की सियासत ने जोर पकड़ लिया है। प्रतापगढ़ सीट पर 23 लाख से अधिक मतदाता हैं। जातिगत मतदाताओं की बात करें तो सबसे अधिक मतदाता पिछड़ी जाति के हैं। इसमें भी सबसे ज्यादा यादव व कुर्मी हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में पिछड़ी जाति, दलित व सवर्णों ने अद व भाजपा गठबंधन के प्रत्याशी हरिवंश सिंह को पौने दो लाख मतों से विजयी बनाया था।
इस बार भले ही भाजपा ने हरिवंश सिंह को मैदान में नहीं उतारा, लेकिन सदर से अपना दल एस के विधायक संगमलाल गुप्ता को पार्टी का प्रत्याशी 15 अप्रैल को घोषित किया। संगमलाल गुप्ता वर्ष 2014 के चुनाव में भी सांसद का टिकट मांग रहे थे। वह क्षेत्र में बराबर संपर्क भी करते रहते थे। कांग्रेस ने पूर्व सांसद रत्ना सिंह पर ही भरोसा जताया है।
वह कई साल से सांसद का चुनाव कांग्रेस से लड़ती चली आ रही हैं। सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी ने भी सदर से विधानसभा चुनाव में ताल ठोंक चुके अशोक त्रिपाठी पर दांव लगाया है। इसके अलावा सपा से सांसद रह चुके अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक से मैदान में हैं। दलित वोटर मूलत: बसपा के मत माने जाते हैं। जिनकी संख्या भी करीब एक लाख से अधिक है।
जातिवार मतदाता
मुस्लिम मतदाता 192788
एससी मतदाता 268588
ओबीसी मतदाता 524569
सवर्ण मतदाता 422578
2014 के लोकसभा चुनाव में मिले वोट
भाजपा -अद हरिवंश सिंह 375789
सपा प्रमोद पटेल 120107
बसपा आसिफ निजामुद्दीन 207567
कांग्रेस रत्ना सिंह 138620