प्रदेश सरकार में प्रो. शिवाकांत ओझा को दोबारा कैबिनेट मंत्री बनाकर सपा सरकार ने आने वाले विधानसभा चुनाव में ब्राम्हणों को अपने पाले में करने के साथ ही खुद को ब्राम्हण हितैषी साबित करने का दांव चला है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के इस कदम से बेल्हा का कद फिर प्रदेश की सियायत में बढ़ा है। राजा भैया के बाद दूसरी बार शिवाकांत ओझा को सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
सोमवार को मंत्रिमंडल विस्तार में रानीगंज विधायक व पूर्व मंत्री को भी अचानक मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। शिवाकांत को दोबारा मंत्री बनाकर सपा ने जहां जनपद का कद बढ़ाया है वहीं आने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए ब्राम्हणों को अपने पाले में करने के लिए दांव भी चला।
हालांकि पूर्व मंत्री व विश्वनाथगंज विधायक स्व. राजाराम पांडेय के निधन के बाद सपा मुखिया ने संजय पांडेय को उसी विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित कर पार्टी को ब्राम्हणों का हितैषी बताने का प्रयास किया, लेकिन उसे जनपद के साथ ही पूरे प्रदेश में ब्राम्हणों को रिझाने के लिए योग्य व प्रभावशाली चेहरे की तलाश थी। ऐसे में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पसंद शिवाकांत ओझा बने। बतादें कि इसके पूर्व भाजपा की सरकार में वर्ष 1996 से लेकर 2001 में वह कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। सपा से रानीगंज विधानसभा से चुनाव जीतने वाले शिवाकांत को लोकसभा चुनाव 2014 के ठीक पहले प्राविधिक शिक्षा मंत्री बनाया गया था। 28 अक्तूबर 2015 को उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। तब से लेकर कई बार उन्हें मंत्रिमंडल में स्थान मिलने की अटकलें लगाई जाती रहीं लेकिन सोमवार को वह दिन आया।
पूर्व मंत्री व रानीगंज विधायक शिवाकांत ओझा सपा में आने से पहले कमल व हाथी की सवारी कर चुके हैं। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के पहले वह सपा में शामिल हो गए और उन्हें रानीगंज से प्रत्याशी भी घोषित कर दिया गया। अपने राजनीतिक कौशल और अनुभव के चलते वह जल्द ही सीएम अखिलेश यादव के काफी करीब आ गए। सीएम से उनकी नजदीकी इस कदर थी कि एक बार उन्होंने अपने स्थान पर प्रो. ओझा को चीन भेजा था। दरअसल कुछ तकनीकी मामलों की जानकारी के लिए मुख्यमंत्री को चीन जाना था। अचानक कोई जरूरी काम आ जाने से उन्हें अपना दौरा रद्द करना पड़ा था। तब उन्होंने अपना प्रतिनिधि बनाकर प्रो. ओझा को चीन भेजा था। दोबारा मंत्री पद मिलने के पीछे उनकी मुख्यमंत्री से करीबी बताई जा रही है। कई दिनों से राजभवन में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चल रहीं तैयारियों में उनके नाम तक की चर्चा नहीं थी। अचानक सीएम के हस्तक्षेप के बाद उन्हें मंत्री बनाया गया और आनन-फानन में राजभवन बुलाया गया। जहां उन्होंने मंत्री पद की शपथ ली।
कैबिनेट मंत्री प्रो. शिवाकांत ओझा तीसरी बार कैबिनेट मंत्री बने हैं। सूबे में भाजपा की सरकार बनने पर 1999 से लेकर 2001 तक वह मंत्री रहे। सपा में आने के बाद वह रानीगंज से विधायक बने। लोकसभा चुनाव के पूर्व 2013 में सपा सरकार में प्राविधिक शिक्षा मंत्री बनने का मौका मिला। फिर बर्खास्ती का दंश भी झेलना पड़ा। सोमवार को वह तीसरी बार प्रदेश सरकार में मंत्री बने। खास बात यह है कि भाजपा व सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री ही बनाए गए। कभी राज्यमंत्री नहीं बने।