माह ए रमजान की बात हो और खजूर का जिक्र न हो, ये हो नहीं सकता। रमजान में खजूर की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है, क्योंकि पैगंबर ए इस्लाम खजूर से ही रोजा खोलते थे। वैसे तो बाजार में कई वैरायटी के खजूर मौजूद हैं, लेकिन रोजेदारों की पहली पसंद मदीने का खजूर हैं।
रमजान में खजूर की दुकानें गुलजार हो गई हैं। शहर के फलमंडी, बाबागंज, सिप्तैन रोड समेत ग्रामीण अंचल के बाजारों व मुस्लिम इलाकों में खजूर की दुकानों पर रोजेदारों की खासी चहल पहल देखने को मिलती है। शहर में ही खजूर की छोटी व बड़ी मिलाकर करीब दर्जन भर दुकानें लगती हैं। जहां रोजेदारों के लिए खजूर की वैरायटी मौजूद हैं।
इस बार बाजार में खजूर की 10-15 किस्में आईं हैं। जो सौ रुपये से लेकर 15 सौ रुपये किलो तक है। फलमंडी गेट पर खजूर की दुकान लगाने वाले शाहिद की मानें तो साल दर साल रमजान में खजूर की डिमांड बढ़ गई है। बाजार में महंगे और सस्ते दोनों किस्म के खजूर मौजूद हैं।
ईरान व इराक से भी आते हैं खजूर
बाजार में कई देशों के खजूर आते हैं। इनमें ईरान, इराक, मसकट, दुबई और मदीना शामिल है। रोजेदारों में सबसे अधिक मदीना खजूर की डिमांड है। जो दो सौ से लेकर एक हजार रुपये प्रति किलो की दर से मौजूद हैं। कई वैरायटी के खजूर की कीमत चार हजार रुपये प्रति किलो है। जो कम बिकता है। इसलिए उसे डिमांड के बाद ही मंगाया जाता है। इसके लिए दुकानदार एडवांस रुपये भी जमा कराते हैं।
खजूर से इफ्तार सुन्नत
वैसे तो इफ्तार में खाने पीने की कोई पाबंदी नहीं है। रोजेदार अपनी पसंद का कोई भी चीज खा सकता है। इस्लाम की रिवायत के मुताबिक खजूर से रोजा खोलना सुन्नत है।
बाजार में हर वर्ग के लिए खजूर
रमजान पर बाजार में हर वर्ग के लिए खजूर मौजूद है। बाजार में सौ रुपये प्रति किलो से लेकर 15 सौ रुपये तक के खजूर हैं। जो कई वैरायटी के हैं। रोजेदार अपनी जरूरत और जेब के हिसाब से खजूर खरीद सकते हैं। लोअर क्लास में ईरानी, मिडिल क्लास में हसना, जुमरा और हाईक्लास में कल्मी, अंबर और अजुवा की डिमांड है।