सफर के दौरान मरने वाली वृद्ध महिला की लाश मुसाफिरों के बीच ट्रेन में करीब बारह घंटे तक पड़ी रही। दिन-रात के सफर के बाद बुधवार को प्रतापगढ़ पहुंची ट्रेन से शव को उतारकर जीआरपी ने पंचनामा किया। बाद में उसको परिजनों को सौंप दिया। अमेठी संग्रामपुर की रहने वाली रानीदेवी (75) पत्नी मन्नूलाल बीमार चल रही थी। देहरादून में उसका इलाज चल रहा था। मंगलवार को परिजन उसको लेकर जनता एक्सप्रेस से घर आ रहे थे। पुलिस के अनुसार दोपहर को मुरादाबाद रेलवे स्टेशन के करीब रानी देवी की मौत हो गई। परिजनों ने इसकी सूचना रेलवे कंट्रोल को दी। कंट्रोल ने इस बारे में प्रतापगढ़ जीआरपी को अवगत कराया। जनता एक्सप्रेस बुधवार को दोपहर बाद प्रतापगढ़ पहुंची। जीआरपी वालों ने शव को उतारकर उसका पंचनामा करवाया। परिजनों ने बताया कि रानीदेवी की मौत बीमारी के चलते हुई है।
उनको कोई शिकायत नहीं करनी है। सवाल उठता है कि एक लाश बारह घंटे तक ट्रेन में बाकी मुसाफिरों के साथ भला कैसे सफर कर सकती है। रास्ते में कई जीआरपी थाने थे। वहां पर लाश को उतारा जा सकता था। लाश की वजह से ट्रेन में सफर करने वाले बाकी मुसाफिरों को भी परेशानी आई होगी। रेलवे ने इस बातों पर ध्यान नहीं दिया। हालांकि इस बारे में सीनियर डीसीएम लखनऊ अजीत सिन्हा का कहना है कि रेलवे में ऐसा कोई प्रावधान नहीं हैं। जिसमें लाश घर तक पहुंचाई जा सके। ऐसे मामलों में परिजनों की गुजारिश और बाकी मुसाफिरों के ऐतराज न करने पर ही लाश को ले जाने दिया जा सकता है। एसओ जीआरपी वीके सिंह का कहना है कि कंट्रोल से इसकी सूचना मिली थी। परिजनों ने बताया कि रानीदेवी की मौत बीमारी के चलते हुई है।