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पूजा पाठ के बाद सौ बेड के नए भवन में संचालित किया गया महिला अस्पताल

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महिला अस्पताल के पीछे 100 बेड के अस्पताल भवन के उद्घाटन में पूजन करते सीएमओ। - फोटो : PRATAPGARH
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पहले दिन 849 मरीज पहुुंचे, माइनर ओटी व एसएनसीयू भी करने लगा काम
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कई दिनों से चल रही थी तैयारी, अधिकारियों की हरी झंडी मिलने के बाद खुला अस्पताल का द्वार
प्रतापगढ़। काफी दिनों से गर्भवती महिलाओं को जर्जर महिला अस्पताल में सुविधाएं न होने के कारण उपचार के लिए भटकना पड़ रहा था। समस्या को देखते हुए आपरेशन से लेकर नवजात बच्चों का उपचार भी बंद कर दिया गया था। शुक्रवार को पहले दिन 849 मरीजों का उपचार किया गया। तीन डाक्टरों ने पूजन अर्चन के बाद मरीजों का इलाज शुरू किया।
जिला महिला अस्पताल की ओपीडी, ओटी और एसएनसीयू के साथ इमरजेंसी वार्ड पूरी तरह जर्जर हो गया था। बीते शुक्रवार को बरसात के चलते एसएनसीयू और ओटी का छत में दरार आ गई और प्लास्टर गिरने लगा। नवजात बच्चों के साथ कई मरीज बाल बाल बचे। महिला सीएमएस ने एसएनसीयू के साथ ओटी में ताला लगवा दिया। मरीजों के भर्ती पर रोक लगाकर अधिकारियों को मामले से अवगत कराया। शासन से आदेश मिलने के बाद शुक्रवार को महिला अस्पताल के बगल बने सौ बेड वाले भवन से मरीजों का उपचार शुरू हो सका। प्रात: आठ बजे महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. रीना प्रसाद और सीएमओ एके श्रीवास्तव ने पूजन अर्चन कर मरीजों का इलाज शुरू कराया। अस्पताल में ओपीडी और एसएनसीयू सेवा भी प्रारंभ कर दी गई। महिला अस्पताल की सीएमएस के साथ डॉक्टर नीलिमा सोनकर, वर्षा श्रीवास्तव ने ओपीडी में बैठकर करीब 849 मरीजों का इलाज किया। दोपहर बाद ओटी भी तैयार हो गई। नीलिमा सोनकर ने चार महिलाओं की नसबंदी भी की। महिला अस्पताल में महज दवा वितरण हो रहा है। शनिवार सुबह से इमरजेंसी भी नए भवन में चलने लगेगी।
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सप्ताह भर बाद एसएनसीयू में आए तीन नवजात
सप्ताहभर से बंद चल रहे एसएनसीयू वार्ड शुक्रवार की सुबह जैसे ही नए भवन में प्रारंभ हुआ। तीन नवजात को लेकर परिजन उपचार कराने पहुंचे गए। ऑक्सीजन पाइप लाइन न बिछाए जाने के कारण तीनों बच्चों का प्राथमिक उपचार करने के बाद सभी को प्रयागराज के लिए रेफर कर दिया गया।
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