1991 के लोकसभा चुनाव में जबरदस्त लहर के बाद भी भाजपा जीतते-जीतते हार गई। भाजपा के उदयराज मिश्र और जनता दल के राजा अभय प्रताप सिंह के बीच कांटे की टक्कर हुई। अंतत: राजा अभय प्रताप सिंह 3696 वोटों से चुनाव जीत गए। प्रतापगढ़ संसदीय सीट के इतिहास में यह सबसे कम अंतर से दर्ज की गई जीत थी।
मतगणना के बाद पुनर्मतगणना के लिए भाजपा प्रत्याशी उदयराज मिश्र कोर्ट चले गए, लेकिन उन्हें यह आदेश पांच साल बाद तब मिला जब वह 1996 के लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन करने जा रहे थे। इस चुनाव में कांग्रेस के राजा दिनेश सिंह तीसरे स्थान पर चले गए थे। लोकसभा के साथ ही हुए विधानसभा चुनाव में पांच में से चार सीटें भाजपा ने जीती थीं।
प्रतापगढ़ संसदीय सीट पर लोकसभा चुनाव का सबसे नजदीकी मुकाबला भाजपा के उदयराज मिश्र और जनता दल के राजा अभय प्रताप सिंह के बीच हुआ था। उस समय सूबे के साथ ही जिले में भी भगवा लहर चल रही थी। लोकसभा के साथ 5 विस क्षेत्रों में सिर्फ रामपुर खास से प्रमोद तिवारी जीते थे। शेष चारों सीटें बिहार से सुरेश भारती, गड़वारा से बाबा रमेश बहादुर सिंह, सदर से बृजेश शर्मा और कुंडा से शिवनारायण मिश्र ने जीत दर्ज कर भाजपा की झोली में डाली थीं।
वह जमाना इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन का नहीं मतपत्रों का था। सुबह से शुरू हुई गिनती रात बीतने के बाद भोर तक जारी रही। भाजपा के चार विधायक जीतने के बाद अपने समर्थकों के साथ बाहर चले गए। भाजपा के लोकसभा उम्मीदवार उदयराज मिश्र का जीतना भी लगभग तय हो गया और फूल-मालाएं भी आ गई थीं। कांग्रेस के राजा दिनेश सिंह तीसरे स्थान पर चले गए थे।
भोर में मतगणना स्थल पर अचानक अफरातफरी बढ़ी और उदयराज मिश्र के 107142 वोटों के मुकाबले जनता दल के अभय प्रताप सिंह 110838 वोट पाकर विजयी घोषित कर दिए गए। 3696 मतों के अंतर से हुई यह जीत जिले के लोकसभा चुनाव के इतिहास की सबसे छोटी थी। उदयराज मिश्र ने पुनर्मतगणना की मांग को लेकर कोर्ट की शरण ली।
कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए तेजी तो दिखाई थी, लेकिन फैसला आते-आते बहुत देर हो गई। पांच साल बाद जिस दिन उदयराज मिश्र 1996 में लोकसभा के लिए नामांकन करने की तैयारी कर रहे थे, उस दिन उन्हें कोर्ट से पुनर्मतगणना का आदेश मिला था।
1996 के चुनाव में भी लगे थे धांधली के आरोप
राजा दिनेश सिंह की मौत के बाद उनकी बेटी रत्ना सिंह का 1996 में पहला चुनाव था। सीट राजा अभय के पास थी, लेकिन दिनेश सिंह की मौत के बाद रत्ना सिंह के प्रति लोगों में सहानुभूति थी। उधर भाजपा के उदयराज मिश्र के प्रति भी लोगों में भारी सहानुभूति थी। हर ओर यही कहा जा रहा था कि 1991 का चुनाव जनता ने तो उन्हें जिताया था, लेकिन खेल कर उन्हें हरा दिया गया।
उदयराज ने मुकाबला भी बखूबी किया। रत्ना सिंह ने 139326 वोट पाकर जीत दर्ज की, जबकि उदयराज को 117689 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा था। इस चुनाव में 70 हजार मतमत्र गायब होने और मतगणना के दिन कांग्रेस के निशान पर मुहर लगाकर मतपत्र मिलाने का आरोप लगा। हालांकि पिछला हस्र देखते हुए उदयराज मिश्र ने कोर्ट जाने की भी हिम्मत नहीं जुटाई।
प्रत्याशी दल मत
अभय प्रताप सिंह जनता दल 110838
उदयराज मिश्रा बीजेपी 107142
राजा दिनेश सिंह कांग्रेस 70648
मंशा अहमद जेपी 22296
हरिनाथ यादव बीएसपी 18132
अब्दुल खालिक आईएनडी 4605
अब्दुल हामिद आईएनडी 3171
प्रमोद कुमार सिंह आईएनडी 2978
सुंदरलाल एसएसपी 2277
अवधेश नारायण आईएनडी 2168
राम अवध आईएनडी 2043
रामसुमेर आईएनडी 1464
श्रीनारायण आईएनडी 1448
रवि प्रताप आईएनडी 1427
बृजभवन सिंह आईएनडी 1409
बेनी माधव यादव आईएनडी 1175
अब्बास अली आईएनडी 1065
सूर्यबली डीडीपी 974
रामलौट आईएनडी 916
हनुमान आईएनडी 890
राम अभिलाष आईएनडी 837
कमलेश चंद्र पांडेय आईएनडी 761
इमरान आईएनडी 734