बेटियों के हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पिता सुभाष बुुधवार को दोबारा अंबेडकर चौराहे पर धरने पर बैठ गया। दोबारा अंबेडकर प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठे सुभाष को कुनबे समेत कोतवाली पुलिस जबरन घर उठा ले गई। इस दौरान चौराहे पर अफरातफरी मची रही। चौराहे पर पीएसी तैनात कर दी गई।
नगर कोतवाली के चकबनतोड़ निवासी सुभाषचंद्र राव की बेटी शिवांगी व अंजलि दो दिसंबर को स्कूल से गायब हो गई थीं। दूसरे दिन उनकी लाश सांगीपुर थाना क्षेत्र के कुंभापुर घाट सई नदी में मिली थी। इस मामले में नगर कोतवाली में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ अगवा करने का मुकदमा दर्ज किया था। बेटियों की हत्या का आरोप लगाकर पिता सुभाष आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हैं। परिजनों में सदर विधायक राजकुमार पाल के रवैए पर भी नाराजगी है। सोमवार को सुभाष घरवालों के साथ अंबेडकर प्रतिमा के नीचे अनशन पर बैठे थे। हालांकि रात में पुलिस ने सभी को जबरन उठाकर घर पहुंचा दिया था।
मंगलवार को पुलिस ने दोनों बहनों की मौत के मामले में मोबाइल दुकानदार सुरेश को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पुलिस ने राहत की सांस ली, लेकिन बुधवार को सुभाष अपने परिजनों के साथ फिर अंबेडकर चौराहे पर आ गए। पुलिस जब तक चेतती उससे पहले ही सुभाष अपने पिता, मां, पत्नी, बच्चों के साथ धरने पर बैठ गए।
इसकी जानकारी पर सीओ सिटी अभय पांडेय नगर कोतवाल, कोहड़ौर थानाध्यक्ष के साथ पीएसी लेकर चौराहे पर पहुंचे। परिजनों से बातचीत के बजाय जबरन सभी को नगर कोतवाल की जीप में बैठा दिया। इसके बाद सभी को घर भेज दिया गया। सुभाष का आरोप था कि पुलिस को सुरेश को जिस धारा में जेल भेजना चाहिए था, वह नहीं किया बल्कि दूसरी धारा में उसे जेल भेजा है। जो लोग उसकी बेटियों की हत्या में शामिल रहे हैं, उनकी धरपकड़ नहीं की जा रही है। बेटियों को इंसाफ दिलाने तक वह संघर्ष जारी रखेंगे।
राजनैतिक दलों के नेताओं के हटते ही पुलिस ने की कार्रवाई
अंबेडकर प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठे सुभाष की मदद के लिए कांग्रेस, भीम सेना के पदाधिकारी भी चौराहे के करीब आकर संघर्ष में साथ देने की बात कहते रहे। जैसे ही राजनैतिक दलों के नेता चौराहे से ओझल हुए कि पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस सभी को लेकर चकबनतोड़ चली गई। कुछ देर तक चौराहे पर पीएसी तैनात रही।
बलि का बकरा तो नहीं बनाया गया सुरेश
सगी बहनों की मौत के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर अब कई तरह से सवाल खड़े हो रहे हैं। पहले पुलिस इस मामले को पूरी तरह आत्महत्या बताते हुए पल्ला झाड़ती रही। परिजनों के धरने पर बैठने और विपक्षी दलों के प्रदर्शन के बाद दबाव में आई पुलिस ने इस मामले में आननफानन में मोबाइल दुकानदार सुरेश को जेल भेज दिया। पुलिस का तर्क है कि उसने सगी बहनों के बारे में पुलिस को सूचना नहीं दी थी।
अब सिर्फ पुलिस को सूचना नहीं देने से कोई आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी कैसे हो सकता है, यह तो पुलिस ही बता सकती है। एक अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर उसे दोनों बहनों को आत्महत्या के लिए उकसाना होता तो उसने उनके पिता को फोनकर दोनों के बारे में जानकारी क्यों दी होती। घटना के खुलासे में फेल पुलिस ने अपनी गर्दन बचाने के लिए कहीं सुरेश को बलि का बकरा तो नहीं बना दिया। पुलिस की इस कार्रवाई से सगी बहनों के परिजन भी असंतुष्ट हैं।
अम्बेडकर चौराहे पर धरने पर बैठे मृत बेटियों के परिजनों को गिरफ्तार कर ले जाती पुलिस।- फोटो : PRATAPGARH
अम्बेडकर चौराहे पर दोबारा धरने पर बैठे मृत बेटियों के परिजन।- फोटो : PRATAPGARH