जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में दम तोड़ने वाले कोराना मरीज को सांस लेने में तकलीफ होने और कोरोना के लक्षण दिखने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने प्रयागराज के कोविड-19 अस्पताल नहीं भेजा। उसे यहीं रखा गया। बाद में उसकी मौत हो गई।
मृतक के परिजनों ने अस्पताल में उसे खाना नहीं देने और लापरवाही का आरोप लगाया है। लापरवाही सामने आने के बाद डीएम ने मामले में मजिस्टीरियल जांच बैठा दी है। एसडीएम सदर को जांच अधिकारी नामित करते हुए सात दिन के अंदर रिपोर्ट मांगी है।
अंतू इलाके के पूरे तुलाई (मझिलहा) निवासी टैक्सी चालक नौ मई को गांव आया था। गांव पहुंचने से पहले वह सुखपालनगर पीएचसी गया और होम क्वारंटीन होने की मुहर लगवाकर अपने घर आ गया। उसने अपनी थर्मल स्क्रीनिंग भी कराई थी। इस दौरान उसे स्वस्थ बताया गया था।
11 मई को तबियत खराब होने पर उसे जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया। उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। मृतक के पिता का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद उसे न तो खाना दिया गया और न ही दवाएं दी गईं। जिससे बेटे की हालत बिगड़ती गई और अंतत: उसकी मौत हो गई।
उसने भाई और बेटे के साथ सीएमओ को भी फोन कर शिकायत दर्ज कराई थी, मगर कोई सुनने को तैयार नहीं हुआ। इधर, खाना और दवा के अभाव में मरीज की मृत्यु होने की जानकारी होने पर सांसद संगमलाल गुप्ता और भाजपा जिलाध्यक्ष हरिओम मिश्र से शिकायत की। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने मजिस्ट्रेटी जांच बैठा दी है।
एसडीएम सदर मोहनलाल गुप्ता को नामित करते हुए सात दिन के अंदर रिपोर्ट तलब की है। डीएम ने एसडीएम से इस बिंदु की गहराई से जांच करने को कहा है कि जब मरीज को सांस लेेने में तकलीफ थी तो उसे एल वन हॉस्पिटल क्यों नहीं भेजा गया।
कोरोना पीड़ित की जिला अस्पताल में हुई मौत के मामले में हर पहलुओं की जांच कराई जाएगी। अगर उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी तो उसे प्रयागराज भेजा जाना चाहिए थे। एसडीएम सदर को जांच अधिकारी नामित करते हुए रिपोर्ट मांगी गई है।
डा. रुपेश कुमार, जिलाधिकारी
शव के इंतजार में परिजनों का बुरा हाल
जिला अस्पताल में भर्ती कोरोना पीड़ित अधेड़ की मौत की जानकारी मिलने के बाद परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था। शव नहीं मिलने से उनमें नाराजगी थी। हालांकि बुधवार शाम को रिपोर्ट पाजिटिव आने के बाद प्रशासन ने खुद अंतिम संस्कार कराने का फैसला लिया। मौके पर परिजनों को भी बुला लिया गया।
शिकायत के बाद भी ठेकेदार पर नहीं हुई कार्रवाई
पुरुष और महिला अस्पताल में मरीजों को खाना देने वाले ठेकेदार की लापरवाही पहली बार नहीं सामने आई है। इसके पहले भी तत्कालीन डीएम के सामने खाना नहीं देने का मामला उठा था। नेताओं की शिकायत पर जांच प्रारंभ हुई थी, मगर बाद में मामले को रफा-दफा कर दिया गया था।