बहुजन समाज पार्टी ने प्रतापगढ़ संसदीय सीट पर तीसरी बार ब्राह्मण कार्ड खेला, लेकिन इस बार भी उसे सफलता नहीं हासिल हुई। सपा का साथ मिलने के बाद भी पार्टी दूसरे नंबर पर रही रही। हालांकि पहले के मुकाबले उसका वोट प्रतिशत जरूर बढ़ा है।
1989 से लोकसभा चुनाव का सफर शुरू करने वाली मायावती बेल्हा में एक बार मुसलिम, दो बार ब्राह्मण और चार बार पिछड़ी जाति का कार्ड खेल चुकी थीं। 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी के प्रत्याशी तीसरे और चौथे स्थान पर रहे। 2009 में बसपा प्रत्याशी प्रो. शिवाकांत ओझा दूसरे नंबर पर रहे।
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने एक साल तक डा. आरके वर्मा को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। बाद में मुज्तबा सिद्दीकी और फिर आसिफ निजामुद्दीन सिद्दीकी के नाम पर फाइनल मुहर लगी। आसिफ ने चुनाव मैदान में मौजूदगी तो दर्ज कराई, लेकिन किसी भी विधानसभा में वह जीत नहीं दर्ज कर सके। आखिरकार पार्टी को एक बार फिर दूसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा था।
इस बार बसपा ने सदर से विधानसभा का चुनाव लड़ चुके अशोक त्रिपाठी पर दांव लगाया। काफी पहले ही उन्हें लोकसभा का प्रभारी बनाकर क्षेत्र में जनसंपर्क करने के लिए भेजा। वह लगातार क्षेत्र में बने रहे लेकिन, आखिर में सपा से गठबंधन के बाद भी अशोक त्रिपाठी पार्टी को जीत दिलाने में नाकाम रहे। वर्ष 2019 के चुनाव में भी बसपा को गठबंधन के बाद भी दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।
लोस चुनाव में उतरने के बाद से बसपा का प्रदर्शन
वर्ष प्रत्याशी मत स्थान
1989 वीरेंद कुमार 31429 तीसरा
1991 हरीनाथ सिंह यादव 18132 चौथा
1996 बसीर पहलवान 36964 चौथा
1998 जयसिंह यादव 62787 चौथा
1999 अशोक कुमार 78923 तीसरा
2004 एसपी मिश्र सेनानी 82876 तीसरा
2009 शिवाकांत ओझा 169137 दूसरा
2014 आसिफ सिद्दीकी 207182 दूसरा
2019 अशोक त्रिपाठी दूसरा