जिले में घपलेबाजी की भेंट चढ़ चुकी पं दीनदयाल विद्युतीकरण योजना में बचे 1100 मजरों का विद्युतीकरण पांच साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। कार्यदायी संस्था आरकेईसी को ब्लैकलिस्टेड करने के बाद करीब दो साल पहले इसकी जिम्मेदारी बजाज संस्था को दी गई थी। मगर इस संस्था ने भी विद्युतीकरण में जमकर लापरवाही बरती। टाइम लाइन की तरफ ध्यान नहीं दिया।
यही वजह रही कि दो साल में 1100 मजरों के सापेक्ष महज 400 मजरे ही रोशन हो सके। विद्युत विभाग ने इसे संज्ञान में लेते हुए कार्यदायी संस्था को ब्लैकलिस्टेड का अल्टीमेटम दिया है।
बिजली से वंचित मजरों को रोशन करने के लिए करीब चार साल पहले सरकार द्वारा पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत 5042 मजरों को चिह्नित कर प्रस्ताव भेजा गया था। पहले चरण में 2805 मजरों के विद्युतीकरण के लिए बजट स्वीकृत हुआ था।
विद्युतीकरण की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था आरकेईसी को दी गई थी। विद्युतीकरण में संस्था ने जमकर अनियमितता बरती। मानक की अनदेखी कर सूची से इतर मजरों में पेाल व तार भेज दिए। पोल व तार का हेरफेर कर मनमानी की गई। सांसद हरिवंश सिंह व विधायक धीरज ओझा ने इसकी शिकायत ऊर्जा मंत्री से की। इस पर लखनऊ व वाराणसी से आईं जांच टीमों ने मजरों की पड़ताल की। कई मजरों में अनियमितता पाई गई। इस पर तत्कालीन अधीक्षण अभियंता पर गाज गिरी, उन्हें निलंबित कर दिया गया।
वहीं कार्यदायी संस्था के खिलाफ रिपेार्ट दर्ज कराते हुए उसे ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया। तक आरकेईसी ने 2805 के सापेक्ष 1705 मजरों में विद्युतीकरण का कार्य पूरा किया था। 1100 मजरे बिजली से वंचित थे। बचे 1100 मजरों की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था बजाज इलेक्ट्रानिक्स को दी गई। लगभग दो साल का समय बीतने के बाद भी बजाज 1100 मजरों के सापेक्ष अब तक महज 400 मजरों तक ही बिजली पहुंचा सकी है। अभी भी 700 मजरों में विद्युतीकरण का कार्य नहीं शुरू हो सका है।
आलाधिकारियों ने प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा के बाद कार्यदायी संस्था पर सवाल खड़े किए। कार्य पूरा करने के लिए निर्धारित समय सीमा के साथ ही ब्लैकलिस्टेड करने तक का अल्टीमेटम दिया है। अधीक्षण अभियंता एसके सिंह ने बताया कि बचे मजरों के विद्युतीकरण के लिए कार्यदायी संस्था को निर्देश दिया जा चुका है। कार्य प्रगति पर है।