जिले में स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी महिलाओं की सेहत पर भारी पड़ रही है। तहसील और ग्रामीण इलाकों में स्थित 58 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक भी स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। जिला महिला अस्पताल में तैनात मात्र तीन विशेषज्ञों के भरोसे जिले भर की महिलाओं का इलाज किया जा रहा है। बीते एक साल में इलाज में हुई देरी के कारण 120 महिलाओं की जान चली गई।
जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सरकारी अस्पतालों को सुविधाओं एवं संसाधनों से लैस करने का दावा किया जा रहा है। जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल के अलावा सीएचसी-पीएचसी में विभाग अत्याधुनिक सुविधाएं मुहैया कराने के नाम पर करोड़ों फूंक चुका है। सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड सहित जांच की अन्य आधुनिक मशीनें स्थापित की जा रही हैं।
अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी इन सब पर भारी पड़ रही है। जिले में 58 सीएचसी का संचालन हो रहा है। इनमें से तीन रेफरल सेंटर हैं। मगर एक भी स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की गई है। यहां इलाज के लिए आने वाली महिलाओं को परेशान होना पड़ता है। इलाज के लिए उन्हें मुख्यालय या फिर प्रयागराज और लखनऊ के चक्कर काटने पड़ते हैं।
जिला महिला अस्पताल में महज तीन स्त्री रोग विशेषज्ञों की तैनाती है। जबकि विशेषज्ञों की संख्या 11 होनी चाहिए। डाक्टरों के अभाव में रोग से पीड़ित महिलाओं का समुचित इलाज नहीं हो पाता। सबसे ज्यादा परेशानी गरीब महिलाओं को होती है। खुद स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि समय पर इलाज न मिलने के कारण जिले में एक साल के भीतर 120 महिलाओं की मौत हो चुकी है।
नर्स और एएनएम के भरोसे संचालित हो रहे सरकारी अस्पताल
जिला महिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी स्टाफ नर्स, नर्स और एएनएम के भरोसे संचालित हो रहे हैं। प्रसव पीड़िताओं का प्रसव कराने की जिम्मेदारी नर्सों पर थोप दी गई है। ऑपरेशन की जरूरत पड़ने पर महिला अस्पताल से स्त्री रोग विशेषज्ञ को बुलाया जाता है। एक स्त्री रोग विशेषज्ञ को 24 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है। इसके बाद दो दिनों के लिए उसे अवकाश दिया जाता है। रात में जागने वाली डॉक्टर दिनभर अपना गुस्सा मरीज और तीमारदारों पर उतारती हैं।
डाक्टर के अभाव में जिला महिला अस्पताल में आए दिन होता है हंगामा
डॉक्टर के अभाव में आए दिन महिला अस्पताल में हंगामा होता है। प्रसव पीड़िता या फिर प्रसूता की मौत के बाद तीमारदार अपना गुस्सा स्टाफ नर्स पर उतारते हैं। हंगामा करते हैं। मगर इससे हर कोई अनजान बना है। इस समस्या की ओर किसी का ध्यान नहीं पड़ रहा है।
चिकित्सकों की तैनाती को लेकर अब तक नहीं हुई कोई पहल
सरकारी अस्पतालों में स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती को लेकर विभाग और शासन स्तर से कोई पहल नहीं की गई। इसके चलते एक ओर मरीजों को जहां परेशान होना पड़ता है, वहीं चिकित्सकों को 24 से 36 घंटे लगातार ड्यूटी करनी पड़ रही है।
जो भी डॉक्टर हैं किसी तरह उनसे काम चलाया जा रहा है। डॉक्टरों का अभाव जरूर है, इसके चलते मैं खुद दिन में ओटी और रात में इमरजेंसी में ड्यूटी करती हूं।
रीता दूबे, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल।
डॉक्टरों की मांग शासन से की गई है। लोकसभा चुनाव के बाद स्त्री रोग विशेषज्ञ आ सकती हैं। इन चिकित्सकों की तैनाती जरूरी स्थानों पर की जाएगी।
अरविंद कुमार श्रीवास्तव, सीएमओ।