जिले के तीन पुल की निर्माण गति कछुए की चाल से भी धीमी है। पांच साल पहले अगस्त 2020 में इन पुलों का निर्माण शुरू हुआ। जो अभी तक चल ही रहा है। इसमें से दो पुलों का निर्माण तो पूरा हो गया है, लेकिन डामरीकरण न होने से राहगीर मिट्टी और गिट्टी से भरे रास्ते पर सफर कर रहे हैं। सेतु निर्माण निगम की लापरवाही को देखते हुए तत्कालीन डीएम संजीव रंजन ने नोटिस भी थमा दिया था। उसके बाद भी सेतु निगम मन माफिक काम कर रहा है।
करीब पांच वर्ष पहले शासन ने सई नदी स्थित लिलौरी घाट, बारघाट, खजुरी घाट, बहुचरा, तेजगढ़, तुला राम का पुरवा, जिरियामऊ, ताला समेत नौ पुलों के निर्माण की स्वीकृति दी थी। अगस्त 2024 में पुल निर्माण कार्यों की जांच के लिए लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता विनय कनौजिया, अधीक्षण अभियंता फतेहपुर व अधीक्षण अभियंता सुल्तानपुर की तीन सदस्यीय टीम गठित की गई थी। उन्होंने निरीक्षण में काम की गुणवत्ता को परखा।
मुख्य अभियंता ने सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक प्रशांत कुमार को कार्यों में लापरवाही बरतने पर कड़ी फटकार लगाते हुए जवाब-तलब किया। शासन के दबाव में छह पुलों का निर्माण कार्य को पूरा कर लिया गया। लेकिन, जिरियामऊ, लिलौरी घाट और ताला पुल का निर्माण अभी भी अधूरा है।
लिलौरी और जिरियामऊ पुल को बस बना दिया गया। पुल का न तो डामरीकरण हुआ न ही सौंदर्यीकरण। मार्ग पर बिखरीं गिट्टियां हादसे को दावत दे रही हैं। डीएम रहे संजीव रंजन भी छह दिन पहले ही सेतु निगम को नोटिस थमाया था।
पुल न बनने से राहगीर परेशान
ताला स्थित सई नदी पर पुल नहीं बनने से जाफरपुर, चक मझानीपुर, राजापुर, ओझला समेत करीब 15 हजार की आबादी परैया नाले पर बने लोहे के अस्थायी पुलिया जाने को मजबूर है। पड़री जबर की प्रधान मर्जिया बानो और राजापुर के प्रधान नौशाद ने बताया कि 50 मीटर पुल निर्माण का कार्य शेष है।
प्रत्येक पुल के लिए करीब 12 करोड़ रुपये बजट स्वीकृत हुआ है। छह पुलों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। तीन पुलों का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। मार्ग पर काली सड़क का निर्माण करना शेष है। फरवरी तक इसे भी पूरा कर लिया जाएगा।
- प्रशांत सिंह, परियोजना प्रबंधक, सेतु निगम।