चौदहवें वित्त आयोग की धनराशि खर्च करने के लिए अफसर मसौदा ही तैयार करते रह गए और 436 प्रधानों ने रुपये निकालकर बंदरबांट कर लिया। इसका खुलासा होने पर अफसरों ने प्रधानों पर दबाव बनाते हुए खाते में पुन: रुपये जमा करने और शाखा प्रबंधकों को पत्र जारी कर डीएम के अनुमोदन वाला पत्र दिखाने पर ही भुगतान करने को कहा है।
जिले की 1255 ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराने के लिए शासन ने पहली बार चौदहवें वित्त आयोग की 67.318 करोड़ रुपये चुनाव के ठीक बाद प्रधानों के खाते में भेज दिया गया, मगर रुपये का उपभोग किस तरह किया जाएगा, इसे नहीं बताया गया। जिला प्रशासन ने लगभग तीन माह तक खाते पर रोक लगाए रखी, मगर शासन से ऑनलाइन कार्ययोजना फीड कराकर रुपये खर्च करने का आदेश जारी होते ही जिला प्रशासन ने भी छूट दे दी। इधर, ऑनलाइन कार्ययोजना फीड कराने और अनुमति लेने की बात तो दूर रही, बगैर कार्ययोजना तैयार हुए 436 प्रधानों ने रुपये निकालकर दुरुपयोग कर लिया।
ऑनलाइन जांच में इस बात का खुलासा होने पर अधिकारी हैरत में हैं। जिला प्रशासन अब प्रधानों पर रुपये जमा कराने का दबाव बना रहा है। फिलहाल, जिलाधिकारी ने जिले की सभी बैंकों को पत्र जारी कर प्रधानों को चौदहवें वित्त आयोग की धनराशि का भुगतान करने से पहले उनसे डीएम से अनुमोदन कार्ययोजना मांगने को कहा है। डीपीआरओ कुंवर सिंह यादव ने बताया कि चौदहवें वित्त आयोग की धनराशि खर्च करने के पहले ऑनलाइन फीडिंग और डीएम से अनुमति लेना आवश्यक है। जिन प्रधानों ने बगैर कार्य कराए रुपये निकाले हैं, उनसे तुरंत जमा करने को कहा गया है। ऐसा नहीं करने वाले प्रधानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
कम से कम पांच और अधिकतम 26 लाख
चौदहवें वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायतों को जो धनराशि प्रदान की गई थी, वह जनसंख्या के आधार पर थी। छोटी ग्राम पंचायत को कम से कम पांच लाख रुपये और बड़ी ग्राम पंचायतों को अधिकतम 26 लाख रुपये दिए गए थे।