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आलू की फसल के दुश्मन बने जंगली सुअर

Sat, 27 Dec 2014 11:00 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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आलू की फसल के लिए जंगली सुअर दुश्मन बन गए हैं। नदी-नालों के किनारे के किसान अपनी बर्बाद फसल देखकर रोने के सिवा कोई उपाय नहीं सूझ रहा है। सैकड़ों बीघे आलू की फसल को तहस-नहस करने वाले यह जंगली सुअर जिला प्रशासन और किसानों के लिए चुनौती बने हुए हैं। जिले के किसान नकदी फसल के  रूप में व्यापक पैमाने पर आलू की खेती करते हैं। आलू की खेती काफी लोकप्रिय होने के कारण अधिकांश लोग उगाते हैं। छोटे किसान जहां अपनी जरूरत भर की खेती करते हैं, वहीं बडे़ काश्तकार व्यापक पैमाने पर आलू की खेती करते हैं। कम लागत, कम समय और आसानी से तैयार होने वाली आलू की फसल उगाने के लिए किसान दो माह पहले से ही तैयारी करते हैं। आलू की एक मात्र ऐसी फसल हैं जो नीलगाय से मुक्त होती है।
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मगर इस वर्ष आलू की फसल पर जंगली सुअर का कहर टूट रहा है। नदी-नाले के किनारे स्थित गांवों में आतंक फैलाने वाली यह जंगली सुअर दिन में नदी के  आसपास छुपे होते हैं। शाम होते ही खेतों की ओर कूचकर अपनी भूख मिटाने के लिए टूट पड़ते हैं। सामान्य सुअर से ऊंचे कद के यह जंगली जानवर आदमी को देखने के बाद भी भागते नहीं है, बल्कि जान सासत में देखकर हमला भी कर देते हैं। फसलों की  रखवाली कर रहे किसान कई बार घायल हो गए हैं। संडवा चंद्रिका, बेलखरनाथधाम, शिवगढ़, सांगीपुर, आसपुरदेवसरा, पट्टी, गौरा सहित अनेक ब्लाकों में जंगली सुअर के आतंक से किसान त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। संडवा चंद्रिका के उमरी गांव के प्रधान नागेंद्र बहादुर सिंह की मानें तो आलू की फसल को जंगली सुअर इस तरह बर्बाद कर रहे हैं कि किसानों की पूंजी ही टूट जा रही है। जंगली सुअर के आतंक से परेशान किसानों ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से अपनी फरियाद सुनाई है। मगर अभी तक कोई जिला प्रशासन ने कोई कारगर पहल नहीं उठाई है। जिला कृषि अधिकारी डीके सिंह ने बताया कि ऐसी शिकायतें मिल रही है, समाधान खोजा जा रहा है।
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