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उपडाकपाल और क्लर्क को साथ ले गई सीबीआई

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कुंडा। कुंडा डाकघर में धमकी सीबीआई ने शनिवार सुबह से रात के डेढ़ बजे तक जांच की। उपडाकपाल व क्लर्क के साथ ही सीसीटीवी, कैश सहित काफी कागजात भी कब्जे में ले लिए। इसके बाद टीम लखनऊ रवाना हो गए। टीम की छापामारी के चलते रात तक सभी एजेंट और कर्मचारियों को भी रुकना पड़ा।
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शनिवार की दोपहर में सीबीआई के इंस्पेक्टर अतुल, संजीव कुमार सहित आठ लोगों की टीम ने कुंडा डाकखाने में छापेमारी की। इस दौरान एजेंट पैसा जमा करवा रहे थे। सीबीआई की टीम ने क्लर्क सूरज मिश्रा का हाथ धुलवाया तो वह लाल हो गया। इसके बाद कैश की गिनती कराई गई तो उसमें कैश भी ज्यादा निकला। इस पर उनसे पूछताछ शुरू कर दी गई। इसके पूर्व सभी बाहरी लोगों को बाहर निकाल दिया गया और अंदर रहे एजेंटों को वहीं पर रोक लिया गया। कार्यालय गेट बंद भी अंदर से बंद कर लिया गया। क्लर्क से पूछताछ के बाद उन्होंने उपडाकपाल संतोष से बात की। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज निकाली जाने लगी। एक दूसरी टीम ने जमा किए गए कैश और उसके साथ लगी पर्ची को चेक करना शुरू कर दिया।
शाम चार बजे दो टीमें संतोष और सूरज मिश्रा को लेकर उनके घर गईं और जांच की। शाम करीब सात बजे टीमें लौटीं और सीसीटीवी लगवाने वाले लोगों के बारे में पूछताछ करनी शुरू कर दी। पूछताछ के दौरान पता चला कि सीसीटीवी किसी अधिकारी के आदेश पर नहीं लगवाया गया है। इस पर सीसीटीवी लगाने वाले को बुलाया गया, लेकिन उसने शादी में होने की बात कहते हुए आने से इनकार कर दिया। उधर आसपास के उपडाकघरों के पोस्टमास्टर भी सीबीआई के आने की जानकारी पर कुंडा पहुंच गए। देर रात वह लोग वहीं पर जमे रहे। देर रात दोनों उपडाकपाल और क्लर्क को लेकर सीबीआई बाहर निकली। इसके बाद सीसीटीवी, शनिवार को आया कैश, कंप्यूटर की हार्डडिस्क और कुछ डाक्यूमेंटस लेकर निकल गई।
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एक लाख जमा होने पर 20 से 50 रुपये लिए जाने की थी शिकायत
काफी दिनों से घूम रही थी सीबीआई की टीम
संवाद न्यूज एजेंसी
कुंडा। डाकखाने में काफी दिनों से लेन-देन का काम चल रहा था। यह लेन-देन एजेंटों से ही किया जाता था। यही कारण था कि शिकायत उच्चस्तर पर साक्ष्य के साथ की गई थी। डाकखाने में मौजूद कर्मचारियों को घेरने की तैयारी काफी दिनों से चल रही थी। सीबीआई के लोग कई दिनों से चक्कर लगा रहे थे। पूरा मामला फिट होने के बाद सीबीआई ने छापेमारी की।
कुंड डाकघर में केवीपी के साथ ही आरडी जमा करने के दौरान एक लाख रुपये पर 20 से 50 रुपये लिए जाते थे। इसके साथ ही बड़ा एमाउंट होने पर एक लाख रुपये पर 20 रुपये ही लिए जाते थे। यह सारा लेन-देन एजेंटों से ही किया जाता था। एजेंट भी तुरंत काम कराने के चक्कर में पैसे दे देते थे। यह पैसा उन्हें अपने कमीशन से ही देना पड़ता था। इसकी कई बार शिकायत भी हो चुकी थी, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई थी। चर्चा है कि इसकी शिकायत एक एजेंट ने लखनऊ में उच्चाधिकारियों से साक्ष्य के साथ की थी। इसके चलते सीबीआई ने कुंडा डाकखाने के चक्कर लगाने शुरू कर दिए। पूरी प्रक्रिया समझने के बाद शनिवार को आफिस में छापेमारी की गई। इसका खुलासा शनिवार को छापेमारी के दौरान हुआ। सीबीआई में कुछ चेहरों को एजेंटों ने पहचाना। पहचान के बाद उनके होश उड़ गए। डाकखान से दर्जनों उपडाकघर संबंद्ध होने के चलते यहां भारी कैश जमा होता था। इसी का फायदा कर्मचारी उठाते थे। सीबीआई ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बृजलाल और जांच अधिकारी अवधेश यादव को गवाह के तौर पर इस्तेमाल किया है।
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