कोई हत्या का आरोपी। कोई लाखों की लूट का। किसी ने पड़ोसी को गोली मारी। सब एक से बढ़कर एक खूंखार, लेकिन आजकल हर दिन मास्साब की पाठशाला में अक्षर ज्ञान हासिल कर रहे हैं। जेल में पहुंचने के बाद जुर्म के बड़े खिलाड़ियों से पाला पड़ा, लेकिन जरायम की दुनिया को त्यागकर बंदी इन दिनों पढ़ाई में लगे हुए हैं। जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों के बीच मास्साहब की पाठशाला चल रही है। अवकाश को छोड़कर हर दिन अक्षर ज्ञान मिल रहा है। पढ़ने वाले बंदियों में न सिर्फ किशोर बल्कि अधेड़ और बुजुर्ग भी शामिल हैं।
जिला कारागार में निरुद्ध किशोर बंदियों को शिक्षित करने के लिए जेल अधीक्षक दिलीप पांडेय ने शासनादेश का जिक्र करते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी को कई माह पहले पत्र भेजा। जिसके बाद बीएसए माधव प्रसाद तिवारी ने जेल में निरुद्ध किशोरों को शिक्षित करने के लिए शिक्षक मेराज खान को भेजा। जेल में पाठशाला चलाने की बात सोचकर पहले तो शिक्षक के जेहन में तमाम विचार कौंधे, लेकिन उन्होंने गलत राह पकड़ने वाले किशोरों व दूसरे बंदियों को शिक्षित कर सही राह दिखाने की ठान ली। छह अक्तूबर को उन्होंने जेल में अपनी पहली क्लास लगाई। पहले दिन तो पाठशाला चलाने में शिक्षक मेराज को दिक्कत हुई, लेकिन धीरे- धीरे जेल में निरुद्ध किशोरों को शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ाने में उन्हें कामयाबी हासिल हुई। दिन में सुबह नौ बजे से लेकर दो बजे तक नियमित क्लास चल रही है। तीन माह के भीतर 31 किशोर बंदियों का पंजीकरण वे कर चुके हैं।
इनमें से करीब दर्जन भर ऐसे बंदी थे जिन्हें पढ़ना तो दूर अक्षर ज्ञान तक नहीं था। ऐसे किशोर बंदियों को इल्म की रोशनी दिखाते हुए अब इस लायक बना दिया है कि वे हिन्दी की पुस्तकों को पढ़ना शुरू कर दिए हैं। शिक्षक मेराज का दावा है कि वे बंदियों के बीच इस बात पर जोर देते हैं कि बेहतर जिंदगी जीने के लिए सभी को शिक्षित होना जरूरी है और अपराध से दूर रहकर ही वे अपनी जिंदगी बेहतर बना सकते हैं। किशोर बंदियों को शिक्षा हासिल करते देख अनपढ़ बंदी भी पढ़ रहे हैं। जेल प्रशासन की मानें तो करीब तीस बंदी ऐसे हैं जो अंगूठा लगाते थे या फिर किसी तरह अपने हस्ताक्षर करते थे। ऐसे बंदियों को भी अक्षर ज्ञान कराया जा रहा है।
जेल में निरुद्ध किशोर व दूसरे बंदियों को पाठ्य सामग्री जेल प्रशासन उपलब्ध कराता है। पुस्तकें भले ही बेसिक शिक्षा विभाग से मिल जाती हैं, लेकिन कापी, पेंसिल व पेन जेल प्रशासन देता है। किसी को पढ़ने में दिक्कत न हो इसका खास ख्याल रखा जाता है। जिला कारागार में पुस्तकालय भी है। जिसमें धार्मिक के साथ ही साहित्यिक व इतिहास की पुस्तकें रखी हुई हैं। हर दिन करीब 70 बंदी पुस्तकें पढ़ने के लिए पुस्तकालय से लेते हैं। जेल अधीक्षक दिलीप पांडेय ने बताया कि पुस्तकालय में नई व पुरानी पुस्तकें हैं। कोई भी पुस्तकालय में पुस्तक दे सकता है। जिससे बंदी ज्ञान अर्जित कर सकें।
जिला कारागार में मौजूदा समय में 35 किशोर निरुद्ध हैं। वे चोरी, छिनैती, लूट, जानलेवा हमला व रेप का आरोपी है। जेल पहुंचने के बाद वहां के माहौल का असर किशोरों पर भी पड़ता है। हर दिन चलने वाली मास्साहब की पाठशाला शायद किशोरों के जेहन पर दूसरा असर छोड़ रही है। सभी को शिक्षा के साथ नेक इंसान बनने पर होने वाले फायदों को बताया जा रहा है। अधिकांश अपनी जिंदगी बदलने का वादा भी कर रहे हैं।