अपना दल में मचे बवाल में पार्टी के हित में खून पसीना बहाने वाले कार्यकर्ता पिस रहे हैं। मां-बेटी के राजनैतिक संघर्ष के चलते बेल्हा में कार्यकर्ता अलग-थलग पड़ गए हैं। अब 23 मई को हादीहाल में होने वाली बैठक पर कार्यकर्ताओं की निगाह टिकी हुई है। अब तो विधायक समर्थक कार्यकर्ता अपने सांसद के खिलाफ खेमेबंदी करने लगे हैं।
अपना दल के संस्थापक रहे डा. सोनेलाल पटेल के निधन के बाद पार्टी की कमान उनकी पत्नी कृष्णा पटेल और बेटी अनुप्रिया पटेल ने संभाली। सदर विधानसभा के उपचुनाव में अद का खाता यहीं से खुला था। हाजी मुन्ना पार्टी के पहले विधायक चुने गए। इसके बाद पार्टी दूसरे जिलों में भी मजबूती के लिए प्रयास करती रही। जनपद में आम चुनाव के दौरान दल के सांसद का चुनाव लड़ रहे हरिवंश सिंह को कामयाबी मिली तो वहीं विश्वनाथगंज से भी पार्टी का विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचा। इसके बाद जनपद में पार्टी काफी मजबूत मानी जाने लगी। बीच में दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल ने राष्ट्रीय महासचिव रही अनुप्रिया को पद से हटाते हुए बेटी पल्लवी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया।
इसके बाद पार्टी की विरासत को लेकर घर में ही कलह शुरू हो गई। गत दिनों सांसद अनुप्रिया पटेल को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। जनपद में पहले से ही कृष्णा और अनुप्रिया समर्थक एक दूसरे के विरोध में खेमेबंदी करने लगे। सांसद हरिवंश सिंह ने दो दिन पहले पार्टी की मुखिया कृष्णा पटेल के पक्ष में बयान देते हुए अनुप्रिया के खिलाफ मोर्चा खोला। इसके बाद विश्वनाथगंज विधायक व उनके समर्थकों ने सांसद हरिवंश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इसके बाद सांसद समर्थक कार्यकर्ता भला कैसे शांत रहते। वे भी विधायक के खिलाफ बयानबाजी करने लगे। पार्टी में छिड़े संघर्ष को लेकर गांव-गांव दल के लिए पसीना बहाने वाले कार्यकर्ता असमंजस में हैं। कृष्णा पटेल गुट के जिलाध्यक्ष बृजेश कुमार पटेल ने बताया कि 23 मई को हादीहाल में कार्यकर्ता बैठक आहूत की गई है। इस बैठक को लेकर पार्टी के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं की निगाह गड़ी हुई है।