जिले के कई माननीयों की छवि पर सरकार की नजर लगी हुई है। तीन वर्षो में जनता के बीच उनकी पैठ बरकरार है या वे अपनी कार्यप्रणाली से लोगों का भरोसा खो चुके हैं। सरकार को अपनी रिपोर्ट देने के लिए खुफिया विभाग की टीम गांव की बाजारों का चक्कर काट रही है।
सूबे में सपा की सरकार बने हुए तीन वर्ष पूरा होने वाला है। अपने कार्यकाल में सरकार ने आम जनता के हित में तमाम विकास योजनाओं का ऐलान किया है। गत विधानसभा चुनाव में केवल रामपुरखास की सीट ही कांग्रेस को मिली थी। अन्य छह विधानसभाओं में सपा प्रत्याशियों ने शानदार जीत दर्ज की थी। कुंडा विधानसभा से निर्दल प्रत्याशी के तौर पर रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया ने रेकार्ड मतों से जीत हासिल की थी। हालांकि बीच में पूर्व मंत्री राजाराम पांडेय के निधन के चलते विश्वनाथगंज विधानसभा सीट रिक्त हो गई।
लोकसभा चुनाव के साथ इस सीट के लिए उपचुनाव हुआ। जिसमें सपा प्रत्याशी संजय पांडेया को पराजय का मुंह देखना पड़ा और जीत का सेहरा अद प्रत्याशी के सिर बंधा। सपा को लोकसभा और विश्वनाथगंज विधानसभा के उपचुनाव में करारा झटका लगा। सपा सुप्रीमो जनपद के तीन विधानसभाओं के हालात से पूरी तरह वाकिफ हैं। ऐसे में चार विधानसभाओं पर ही पार्टी के बड़े नेता विशेष ध्यान दे रहे हैं।
सरकार ने चार विधानसभा के माननीयों की कार्यप्रणाली और जनता के बीच उनकी पैठ जानने का जिम्मा खुफिया विभाग को सौंपा है। माननीयों की छवि के साथ उन लोगों की किस बिरादरी में कितनी पकड़ है, कौन से वर्ग के लोग माननीयों से नाराज हैं और इसका कारण क्या है। चूंकि मामला माननीयों से जुड़ा है, इसलिए खुफिया विभाग फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। सूत्रों की मानें तो खुफिया विभाग की टीम हर विधानसभा की छोटे और बड़े बाजारों में बैठकबाजी कर माननीयों की पैठ जानने की कोशिश कर रही है।
जनता के बीच दूसरे दलों के लोग अब पैठ बनाने लगे हैं। सरकार की मुख्य विरोधी दल बसपा ने तो विधानसभाओं के संयोजक के रूप में प्रत्याशियों के नाम का ऐलान भी कर दिया है। सदर और बाबागंज विधानसभा के नामों की अधिकृत घोषणा भी कर दी गई है। भाजपा से चुनाव लड़ने वाले संभावित प्रत्याशी भी सदस्यता अभियान के जरिए जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में जुटे हैं।