शहर में जनरेटर का धुआं और बारिश के बाद सड़क पर पहुंचने वाली मिट्टी वातावरण में जहर घोल रही है। बाजारों के साथ ही रिहायशी इलाकों में जनरेटर का धुएं से लोगों को सांस लेना मुश्किल हो जाता है। जबकि सड़कों पर उड़ने वाली धूल दमा का रोग बांट रही है। साथ ही आंखाें के लिए भी खतरा बढ़ गया है। शहर की किसी भी सड़क पर चलने से दिन भर धूल उड़ रही है। यह लोगों की नाक और मुंह से भीतर लगातार जा रही है। इससे दमा के रोगियाें की संख्या बढ़ रही है।
सड़क के किनारे दुकानें चलाने वाले भी इसके शिकार हो रहे हैं। मौसम बदलने के साथ धूल तो कोढ़ में खाज का काम कर रही है। बिजली न रहने से शहर में चलने वाले जनरेटर का धुआं और भी जहर बन गया है। दमा के रोगी को यह मौसम झेलना मुश्किल हो रहा है। जिला अस्पताल में फिजीशियन के पास ओपीडी में अचानक दमा के रोगियाें की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। कुछ ऐसा ही हाल नेत्र रोग वार्ड का है। यहां तीन-तीन डॉक्टरों के सामने लाइन लगी रहती है। इनकी आंखाें में वातावरण में उड़ने वाले मिट्टी के कण कंजंटिवाइटिस रोग फैला रहे हैं। डॉक्टराें के अनुसार, आंख में कोई कण जाने के बाद विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। लोग कहते हैं कि लाल आंख देखने से सामने वाले की आंख भी लाल हो जाती है, जबकि ऐसा नहीं है। हां जिसकी आंख में कंजंटिवाटिस हो जाता है उसे दूसरे से हाथ नहीं मिलाना चाहिए। किसी का तौलिया भी नहीं इस्तेमाल करना चाहिए और दिन में कई बार ठंडे पानी से आंख धोनी चाहिए।