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टिकट तक सिमटी सियासी वफादारी

Thu, 02 Feb 2017 11:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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राजनी‌ति - फोटो : demo
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चंद्रप्रकाश उपाध्याय
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सियासत में न तो कोई सगा होता है और न ही कुछ तय होता है। सियासी सफर की राह आसान करने के लिए कभी भी कुछ भी संभव है। प्रतापगढ़ में वर्षों से पार्टी के साथ जुड़े नेताओं ने टिकट न फाइनल होने पर दूसरे दलों का दामन थामने के बाद मैदान में कूदकर विधानसभा चुनाव की सरगर्मी बढ़ा दी है। भाजपा-सपा और अद में रहे ऐसे नेताओं को दूसरी पार्टियों ने न सिर्फ हाथोंहाथ लिया है बल्कि सदस्यता ग्रहण करते ही उन्हें उम्मीदवार भी घोषित कर दिया। टिकट न मिलने के बाद ही इन नेताओं की अपनी पार्टी के प्रति सियासी वफादारी खत्म हो गई।

विधानसभा चुनाव में सदर, विश्वनाथगंज और रानीगंज की सीट पर टिकट के लिए दावेदारों की लंबी कतार थी। सबसे ज्यादा दावेदारी भाजपा और अद से थी। इसमें भी सबसे अधिक घमासान सदर की सीट को लेकर मचा था। काफी जोड़तोड़ और मशक्कत के बाद भारतीय जनता पार्टी ने यह सीट अपना दल के खाते में डाल दी। ऐसे में अद के दावेदारों को लगा कि उनकी राह आसान हो जाएगी, लेकिन पिक्चर अभी बाकी थी। सियासत ने अपन रंग दिखाया और भाजपा से लंबे समय से टिकट के लिए प्रयास कर रहे संगमलाल गुप्ता को अपना दल (एस) से उम्मीदवार घोषित कर दिया है। वह लंबे समय तक भाजपा से जुड़े रहे, लेकिन टिकट के लिए पल भर में पार्टी छोड़ने को तैयार हो गए।
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नगर पालिका अध्यक्ष हरिप्रताप सिह भी लंबे समय से भाजपा से जुड़े थे। सदर विधानसभा से भाजपा से टिकट के लिए उन्होंने भी दावेदारी ठोंक रखी थी। काफी प्रयास के बाद भी जब उनकी बात नहीं तो बुधवार को उन्होंने बीजेपी छोड़ कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। पार्टी ने आनन-फानन में उन्हें विश्वनाथगंज सीट से प्रत्याशी घोषित कर दिया है। कांग्रेस से गठबंधन होने के कारण लंबे समय इस सीट पर सपा से दावेदारी कर रहे संजय पांडेय का सपा ने पल भर में पत्ता साफ कर दिया। यही कारण था कि सपा ने जिले की अन्य सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए थे, लेकिन विश्वनाथगंज को रोके रखा गया था। यानि अंदर-अंदर खिचड़ी पक रही थी और सारी पटकथा लिखी जा चुकी थी। अपना दल (एस) में अनुप्रिया पटेल के साथ लंबे समय से सक्रिय दिनेश ज्योतिषी भी टिकट कटने के बाद पलभर में ही पाला बदल गए।
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उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से चुनाव मैदान में कूदने की तैयारी शुरू कर दी। कभी बसपा में नंबर दो माने जाने वाले स्वामीप्रसाद मौर्य के बीजेपी ज्वाइन करते ही उनके भतीजे पूर्व जिपं अध्यक्ष प्रमोद मौर्या भी भाजपा में शामिल हो गए। उन्हें उम्मीद थी कि बीजेपी उन्हें सदर से टिकट देगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। टिकट न मिलने के बाद उन्होंने भी भाजपा से नाता तोड़ अद (कृष्णा पटेल गुट) का दामन थाम लिया। बसपा के टिकट पर वीरापुर विधानसभा से विधायक रह चुके रामशिरोमणि शुक्ला भी काफी समय से बीजेपी से जुड़े थे। टिकट के लिए वह पिछले एक साल से संघर्ष कर रहे थे। ऐन वक्त पर पार्टी ने उनका टिकट काटकर किसी और को प्रत्याशी घोषित कर दिया। इसके विरोध में रामशिरोमणि ने राष्ट्रीय लोकदल का साथ पकड़ लिया और चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहे हैं। कट्टर सपाई माने जाने वाले विनोद पांडेय ने भी पार्टी से टिकट की उम्मीद न देख आननफानन में राष्ट्रीय लोकदल का हाथ थामा और नामांकन भी कर दिया।
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