सदर ब्लाक के जोगापुर में पंचायत उपचुनाव में मतदान के लिए लगी महिलाओं की कतार।
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प्रतापगढ़। त्रिस्तरीय पंचायत उप चुनाव शनिवार को पुलिस की निगरानी में हुआ। संडवा चंद्रिका के रसूलपुर गुलरहा मतदेय स्थल अतिसंवेदनशील बूथ होने से भारी संख्या में फोर्स तैनात रही। शुक्रवार की शाम हुए बवाल के बाद अंतू पुलिस भी पूरे चुनाव प्रक्रिया के दौरान सक्रिय दिखी। एजेंटों के बीच मतदाताओं को लेकर तकरार होती रही। शहर के जोगापुर में शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए भारी संख्या में फोर्स तैनात रही। रसूलपुर में एसडीएम सदर मतदान तक डटे रहे।
संड़वा चंद्रिका की ग्राम पंचायत रसूलपुर गुलरहा में 2195 मतदाताओं में 1242 मतदाताओं ने अपने अधिकार का प्रयोग किया। मतदान करने वालों में 671 महिला और 571 पुरुष शामिल हैं। विकास खंड सदर की ग्राम पंचायत जोगापुर में प्रधान पद और विकास खंड सदर के वार्ड संख्या-35 पूरे खुसई, विकास खंड बाबागंज के वार्ड संख्या-80 मुरैनी के क्षेत्र पंचायत सदस्य पद पर शांतिपूर्ण मतदान कराने के लिए भारी संख्या में फोर्स तैनात रही। रसूलपुर गुलरहा, तेतारपुर मतदान केंद्र पर एजेंटों के बीच मतदाताओं की पहचान को लेकर तकरार होती रही। बवाल रोकने के लिए पुलिसकर्मी पहले ही मतदाताओं के परिचय पत्र चेक कर लिया करते थे। दूसरी ओर जोगापुर मतदान केंद्र पर प्रधान पद के प्रत्याशी एक दूसरे पर नजर रखे हुए थे। बोगस वोटिंग रोकने के लिए प्रत्याशियों ने अपने गुप्तचर छोड़ रखे थे। फिलहाल कड़ी सुरक्षा के बीच शाम को शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न हुआ। जिसके बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली।
आठ जुलाई को होगी मतों की गणना, अधिकारी नामित
डीएम ने 8 जून को होने वाली मतगणना के लिए मजिस्ट्रेटों की तैनाती की है। रसूलपुर गुलरहा में प्रधान पद की मतगणना के लिए सेक्टर मजिस्ट्रेट शैलेंद्र कुमार अधिशाषी अभियंता लोक निर्माण विभाग खंड-1, विकास खंड सदर के जोगापुर में प्रधान पद की मतगणना के लिए सेक्टर मजिस्ट्रेट अजय वर्मा अधिशाषी अभियंता लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड, सदर के 35-पूरेखुसई में क्षेत्र पंचायत सदस्य की मतगणना सेक्टर मजिस्ट्रेट अजय वर्मा, बाबागंज के 80-मुरैनी में क्षेत्र पंचायत सदस्य पद की मतगणना के लिए सुधीर कुमार पाल अधिशाषी अभियंता सिंचाई खंड प्रतापगढ़ को तैनात किया गया है।
नहीं हो सकी फर्जी वोटिंग
प्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए हो रहे उपचुनाव में मतदाताओं को फर्जी वोटिंग से रोकने के लिए एजेंट अलर्ट रहे। फर्जी वोटिंग करने वालों पर प्रत्याशियों के साथ ही अभिकर्ताओं की खासी नजर रही। शंका होने पर पुलिस से शिकायत करने लगते। हालांकि पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए लोग अपने मताधिकार का प्रयोग कर घर लौटते रहे।