देर रात परिजनों की सहमति के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाती पुलिस।
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35 घंटे बाद शव को कब्जे में ले सकी पुलिस
चार शस्त्र लाइसेंस बनने और बीस लाख की तत्काल आर्थिक मदद के बाद माने परिजन
परिजनों से धक्कामुक्की की जानकारी पर आत्मदाह करने के लिए कलेक्ट्रेट की छत पर चढ़े चार वकील
प्रतापगढ़। चार शस्त्र लाइसेंस बनने व बीस लाख रुपये की मदद मिलने पर 35 घंटे बाद मंगलवार रात करीब पौने दस बजे पुलिस अधिवक्ता ओम मिश्र के शव का कब्जे में ले सकी। कचहरी से शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया। इस पर पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली।
इससे पहले गांव से कचहरी शव लेकर आते समय सुखपालनगर व कटरामेदनीगंज में प्रशासन ने परिजनों को रोकने का प्रयास किया। इसे लेकर अधिवक्ता के घरवालों और अधिकारियों के बीच तकरार हुई। कचहरी पहुंचने पर परिजनों की बात सुनने के बाद अधिवक्ता आक्रोशित हो उठे। प्रशासन के रवैए से आहत वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद प्रचंड समेत चार वकील कलेक्ट्रेट की छत पर चढ़कर आत्मदाह करने की धमकी देने लगे। उनके हाथ में केरोसिन था। इस बीच भाजपा नेताओं के साथ कौशांबी सांसद विनोद सोनकर भी कचहरी पहुंचे। सांसद विनोद सोनकर व जूनियर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष लीलाधर दुबे जिलाधिकारी से बातचीत करते रहे। कुछ देर बाद शासन की ओर से 15 लाख रुपये और सांसद विनोद सोनकर ने अपनी तरफ से 5 लाख की परिजनों को मदद दी। ओम मिश्र के चारों भाइयों को शस्त्र लाइसेंस तत्काल बनाकर दिया। तब जाकर परिजन अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार हुए। इसके बाद पुलिस शव को कब्जे में ले सकी।