जिला अस्पताल ओपीडी में पहले दिन ही नहीं हुआ सोशल डिस्टेसिंग का पालन।
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चार माह बाद सोमवार को ओपीडी खुलते ही जिला अस्पताल में मरीजों का रेला उमड़ पड़ा। भीड़ इतनी अधिक थी, सोशल डिस्टेंसिंग का दावा पूरी तरह हवा-हवाई नजर आया। बरामदे में मरीजों की लंबी लाइन लगी रही, जल्दी दिखाने के चक्कर में एक-दूसरे को धकियाते रहे। इधर डाक्टर भी मरीज को हाथ लगाने से कतरा रहे थे, वह भी मरीज से पर्याप्त दूरी बनाकर रोगों के लक्षण की जानकारी करके दवाएं लिख रहे थे।
सोमवार को जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में आम मरीजों के लिए ओपीडी खोल दी गई।
अभी तक दिन भर अस्पताल में सन्नाटा पसरा रहता था, मगर सोमवार को इतनी भीड़ हुई कि डाक्टरों को पीछा छुड़ाना मुश्किल हो गया। पहले की तरह सभी डाक्टर अपने निर्धारित कक्ष में बैठे और मरीजों को देखना शुरु किया। देखते ही देखते बरामदे में मरीजों की लंबी लाइन लग गई। डॉक्टर को दिखाने के लिए आने वाले मरीजों ने तो मास्क लगा रखा था, मगर तीमारदार लापरवाह बने रहे। अस्पताल के पूर्वी गेट पर बैठी महिला थर्मल स्क्रीनिंग कर रही थी, मगर जिसकी इच्छा होती थी, वही स्क्रीनिंग कराता था, बाकी मरीज सीधे लाइन में आकर खड़े हो जाते थे। कोरोना संक्रमण से भयाक्रांत डाक्टर भी मरीजों को छूने और आला लगाने से परहेज करते रहे। वह मरीजों से पर्याप्त दूरी बनाकर रोग के लक्षण पूछकर दवाएं लिखते रहे।