फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पट्टी रोडवेज बस स्टैंड की बदलेगी सूरत

विज्ञापन
Patti Roadways Bus Stand's Appearance Will Change
विज्ञापन
वर्षों से बदहाल पड़े पट्टी रोडवेज बस स्टैंड की सूरत बदल सकती है। एआरएम ने बस स्टैंड के पुनर्निमाण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजकर बजट की मांग की है। दरअसल, अभी बसों का संचालन पट्टी बाजार से किया जा रहा है। जबकि शासन ने इस पर रोक लगा दी है। अवैध वाहन स्टैंडों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है। इसे देखते हुए एआरएम ने पट्टी बस स्टैंड की सूरत बदलने के साथ रानीगंज में प्रस्तावित बस स्टैंड का निर्माण कराए जाने के लिए पत्राचार शुरू कर दिया है।
विज्ञापन

पट्टी तहसील के समीप स्थित रोडवेज बस स्टेशन से कभी दो दर्जन बसों का संचालन होता था मगर, विभाग की उपेक्षा व जनप्रतिनिधियों की अनदेखी की वजह से बस स्टशेन का वजूद खत्म हो गया है। करीब चार साल से बसों का संचालन ठप है। कार्यालय, काउंटर, विश्रामालय सहित सभी भवन जर्जर हो चुके हैं। गर्मी के दिनों में इसे फायर स्टेशन के रूप में प्रयोग किया जाता है।
क्षेत्रीय लोगों ने कई बार इसके संचालन को लेकर जनप्रतिनिधियों एवं अफसरों से गुहार लगाई मगर, किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब योगी सरकार ने प्राइवेट के साथ ही सरकारी बसों को स्टैंड परिसर से संचालन का आदेश दिया है। अवैध वाहन स्टैंड के खिलाफ पुलिस को कार्रवाई का फरमान सुनाया है। इससे पुलिस प्रशासन अलर्ट है। पटरी किनारे खड़ी होने वाली बसों को पुलिस हटवा रही है। अवैध वाहन स्टैंड संचालक गायब हो गए हैं।
विज्ञापन

इससे प्राइवेट के साथ रोडवेज बसों के चालकों और परिचालकों की परेशानी बढ़ गई है। इस पर रोडवेज के एआरएम ने शासन को पत्राचार कर पट्टी के जर्जर हो चुके रोडवेज बस स्टैंड की मरम्मत और रानीगंज में प्रस्तावित बस स्टैंड का निर्माण कार्य शुरू करवाने की मांग की है। जिससे यात्रियों को सहूलियत मिल सके और रोडवेज चालकों के साथ परिचालकों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो।
कभी दिल्ली, कानपुर और वाराणसी के लिए होता था बसों का संचालन
पट्टी को करीब चार दशक पहले 1980 में रोडवेज बस स्टेशन की सौगात मिली थी। तहसील के सामने स्थित बस स्टेशन परिसर में बड़ा सा कार्यालय, विश्रामालय, टिकट घर, पूछताछ केंद्र आदि बनवाए गए थे। यहां से करीब दो दर्जन बसें दिल्ली, कानपुर, वाराणसी, जौनपुर, इलाहाबाद सहित बड़े महानगरों के लिए संचालित की जाती थीं। इससे पट्टी व रानीगंज क्षेत्र से जुड़े करीब 200 गांवोें के लोगों को सहूलियत थी। बस स्टेशन पर सुबह-शाम यात्रियों का रेला लगा रहता था।
मगर जनप्रतिनिधियों एवं विभागीय उपेक्षा की वजह से महज पांच साल में ही बस स्टेशन का अस्तित्व मिट गया। बस स्टेशन अराजकतत्वों का अड़्डा बन चुका है। गर्मी के दिनों में इसे चलता-फिरता फायर स्टेशन बना दिया जाता है। बसों का संचालन पूरी तरह से ठप हो गया है। 24 बसों के सापेक्ष महज दो बसें ही संचालित हो रही हैं, वह भी मनमाफिक। न तो कोई समय सारिणी है और न ही कोई निश्चित स्थान। दो बसों में से एक मुख्यालय तो एक प्रयागराज जाती है।
रानीगंज के यात्रियों को भी होती है परेशानी
रानीगंज से प्रतापगढ़, प्रयागराज अथवा मुंगराबादशाहपुर, जौनपुर जाने वाले यात्रियों को परेशान होना पड़ता है। बस स्टैँड की व्यवस्था न होने के कारण बसों का ठहराव नहीं होता है। लखनऊ-वाराणसी के बीच चलने वाली बसों का स्टैंड नहीं होने के कारण ठहराव नहीं होता है। इसी तरह प्रतापगढ़ से मुंगराबादशाहपुर के बीच कभी आधा दर्जन बसों का संचालन होता था। मौजूदा समय में एक ही बस है। इन दिनों बस को रानीगंज बाजार में नहीं रोका जा रहा है। बाजार से एक किमी पहले ही रोक दिया जाता है। इससे यात्रियों को परेशान होना पड़ता है। वहीं प्रयागराज का सफर तय करने वाले यात्रियों को भी दिक्कत होती है।
रानीगंज में नए और पट्टी के पुराने बस स्टैंड के मरम्मतीकरण के लिए शासन को पत्राचार किया गया है। दोनों बस स्टैंड तैयार होने से जिले के लोगों को काफी सहूलियत मिलेगी। सबकुछ ठीकठाक रहा तो शासन की ओर से हरी झंडी मिल जाएगी। बजट मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। पीके कटिहार, एआरएम, रोडवेज
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें