जिले में आयुष्मान भारत योजना का शुभारंभ हुए एक सप्ताह बीत गए हैं, लेकिन अभी तक इस योजना के तहत जिले के अस्पतालों में एक भी मरीज का इलाज नहीं किया गया है। योजना के तहत एक हजार से भी अधिक गंभीर बीमारियों का पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज होने की सुविधा होने के बाद भी मरीजों के न मिलने से सीएमओ की टेंशन बढ़ गई है। हालत यह है कि डाक्टरों से मरीजों को ढूंढने के लिए कहा जा रहा है।
इलाज के अभाव में किसी की जान न जाए, समय से उनका इलाज हो जाए, इसके लिए सरकार ने आयुष्मान भारत योजना शुरू की है। इस योजना के तहत गरीब परिवार के मुखिया के नाम पर पांच लाख का शासन की ओर से बीमा किया जा चुका है। बीपीएल कार्डधारकों पांच लाख रुपये तक का सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में फ्री इलाज होना है। मजेदार बात यह है कि प्रचार प्रसार के अभाव में यह योजना बेल्हा में दम तोड़ती दिखाई पड़ रही है। सप्ताह भर पहले इस योजना का शुभारंभ किया गया, मगर आज तक सरकारी तो दूर किसी भी प्राइवेट अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को भर्ती करके इलाज नहीं किया गया है। विभाग के सूत्रों की मानी जाए तो प्राइवेट अस्पताल संचालक इस योजना की ओर रुचि नहीं ले रहे हैं तो सरकारी अस्पतालों में मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल में वार्ड तो बना हुआ है, मगर अलग से डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई है। महिला अस्पताल में वार्ड की व्यवस्था तक नहीं की गई है। साधारण मरीज इस योजना के तहत इलाज कराने से दूर भाग रहे हैं। गंभीर मरीज चिकित्सकों को खोजे नहीं मिल रहे हैं। जबकि शासन की ओर से रोजाना सीएमओ से जवाब मांगा जा रहा है कि कितने मरीजों का आयुष्मान भारत योजना के तहत भर्ती करके इलाज किया गया है। इससे सीएमओ परेशान हैं।
सीएमओ ने शहर में स्थित पांच प्राइवेट अस्पतालों को गरीब परिवार के मरीजों का फ्री इलाज करने के लिए चयन किया है। इनमें शांतनु नर्सिंगहोम, अंसारी नर्सिंगहोम, रूमा और मदर अस्पताल शामिल हैं। मगर अभी तक इन अस्पतालों में भी योजना के तहत एक भी मरीज का इलाज नहीं किया गया है।
महिला अस्पताल में नहीं बना है अलग से वार्ड
आयुष्मान भारत योजना के पात्र मरीजों को भर्ती करके इलाज करने के लिए जिला महिला अस्पताल में अलग से वार्ड तक नहीं बना है। जबकि इस योजना के तहत अलग से प्राइवेट जैसा वार्ड बनना है। जिन सीएचसी में इस योजना के तहत मरीजों का इलाज होना है, वहां पर भी किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं की गई है। न तो जांच की व्यवस्था है और न ही गंभीर मरीजों को भर्ती करके इलाज करने की।
महज 37 लोगों को जारी किया गया गोल्डन कार्ड
योजना का शुभारंभ हुए भले ही सात दिन बीत गए हों, मगर अभी तक पात्रों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से गोल्डन कार्ड महज 37 लोगों का ही जारी किया गया है। आए दिन सर्वर फेल रहता है। इससे लोग आते हैं ओर निराश होकर लौट जाते हैं। आयुष्मान मित्र और अन्य पदों पर किसी की तैनाती तक नहीं हो पाई है।
प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। लोग जान भी रहे हैं। मरीज अस्पताल आएंगे तो उनका इलाज किया जाएगा। किसी चिकित्सक से यह नहीं कहा गया है कि वह जबरन किसी को भर्ती करें। ओपीडी में आने वाले लोगों को इसके बारे में जानकारी जरूर दे दें।
एके श्रीवास्तव, सीएमओ।