सई नदी का जल व बेल्हा की मिट्टी कलश में लेकर राम जन्मभूमि अयोध्या भेजने जाते विहिप के लोग।
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अयोध्या में 5 अगस्त को होने वाले राममंदिर शिलान्यास के लिए काशी प्रांत के 19 जिलों के सिद्धि धामों एवं नदियों का जल एकत्र किया जा रहा है। जिले से भी पंचदेवनधाम की मिट्टी व सई नदी का जल भेजा जाएगा। इसके लिए विहिप की टीम को जिम्मेदारी मिली है। मंगलवार को विहिप पदाधिकारियों ने मिट्टी व सई नदी का जल कलश में एकत्रित किया।
बेल्हा से भगवान श्रीराम का गहरा नाता है। 14 वर्षों के वनवास के लिए जाते समय भगवान राम, मां जानकी व लक्ष्मण जिले से होकर गुजरे थे। सई नदी पार करने के बाद जिले के मोहनगंज के समीप सई नदी के तट पर रुके थे। यहां भगवान शिव की पूजा की थी।
जिसे अब पंचदेवन धाम के रूप में जाना जाता है। श्रद्धालुओं की मंदिर से गहरी आस्था है। अयोध्या में भगवान राम के मंदिर निर्माण की तैयारी तेज हो गई है। जिले मेें भी घर- घर हर्षोल्लास का वातावरण है। अयोध्या में भगवान राम के मंदिर के शिलान्यास में पौराणिक नदियों के जल व धाम की मिट्टी भी सामाग्री के तौर पर इस्तेमाल की जाएगी। कांशी प्रांत के 19 जिलों से पौराणिक धामों की मिट्टी और नदियों का जल मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें प्रतापगढ़ भी शामिल है। यहां से आदि गंगा सई का जल व पंचदेवन धाम की मिट्टी अयोध्या जाएगी।
विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी मिली है। जिलाध्यक्ष अमरीश सिंह के नेतृत्व में जिले की कार्यकारिणी के पदाधिकारी कलश लेकर मंगलवार को पंचदेवनधाम पहुंचे। यहां मंदिर के पुजारियों के सहयोग से धाम परिसर में मिट्टी एकत्रकर कलश में व्यवस्थित किया। इसके बाद सई नदी के तट पर पहुंचकर कलश में जल भरा। जिलाध्यक्ष अमरेश सिंह ने बताया कि काशी प्रांत के 19 जिले से पौराणिक स्थलों से मिट्टी व नदियों का जल एकत्र करते हुए संगठन के लोग जल्द ही जिले में पहुंचेंगे। उन्हें मिट्टी और जल के दोनों कलश दिए जाएंगे।