पांच साल बाद मतदाताओं के लिए फिर वह समय आ गया है, जब वह अपने फैसले से पंचायत प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे। ऐसे में सोच-समझकर चुनिए अपना प्रत्याशी और लोकतंत्र के इस पर्व में सौ प्रतिशत हिस्सेदारी निभाइए। अगर चूक गए तो फिर पांच साल तक पछताना पड़ेगा।
मतदाता भाग्यविधाता होते हैं। उनके निर्णय से ही प्रत्याशियों के भाग्य बनते और बिगड़ते हैं। अगर आप यह सोच रहे हैं कि मेरे एक मत से क्या होने वाला है तो आप पूरी तरह गलत हैं। एक मत से किसी प्रत्याशी की जीत और किसी की हार हो सकती है। इसलिए मतदान करने से पहले सही प्रत्याशी का चुनाव अवश्य करें। प्रलोभन में आकर कोई ऐसा निर्णय न करें, जिसके लिए पांच साल तक पछताना पड़े।
भय और दबाव में कभी भी मतदान न करें। इसलिए मतदान करने के पहले यह मंथन अवश्य कर लें कि जिस प्रत्याशी को आज आप चुनने जा रहे हैं, क्या वह आपके मंसूबों पर खरा उतरेगा, क्षेत्र का पर्याप्त विकास करेगा। आप उसी व्यक्ति को वोट दें, जो आपकी और समाज की उम्मीदों पर खरा उतर सकें।