प्रधानी के चुुनाव ने गांवों में आपसी रंजिश बढ़ा दी है। अधिकांश गांवों में गुटबाजी की आग भड़कने लगी है। लालगंज के लक्ष्मणपुर में निवर्तमान प्रधान पर हुई फायरिंग इसका ताजा उदाहरण है। अगर चुनाव तक पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो चुनाव के दिन खूनी संघर्ष हो सकता है। पंचायत चुनाव में प्रधानी का चुनाव प्रशासन के लिए भारी पड़ रहा है। प्रधान की कुर्सी हथियाने के लिए गांव के दबंग लोगों ने स्वयं दावेदारी कर रखी है तो कुछ गांवों में अपने करीबियों को चुनाव लड़ा रहे हैं। गांव के अधिक से अधिक लोगों का वोट हासिल करने के लिए गुटबाजी चरम पर है। लोग अलग-अलग खेमों में बंट गए हैं। प्रधानी की कुर्सी हासिल करने के लिए हर हथकंडा आजमाया जा रहा है। एक गुट पर अपना प्रभाव जमाने के लिए आए दिन मारपीट की वारदातें भी हो जा रही हैं।
गांवों में अलग-अलग गुटों में जबरदस्त तनातनी है। छोटी-छोटी बातों को लेकर तूल देने वाले गांव के दबंगों ने सामान्य मतदाताओं का जीना दूभर कर दिया है। लालगंज इलाके के लक्ष्मणपुर में निवर्तमान प्रधान संजीव मिश्र पर गोलियां बरसाकर उन्हें मौत के घाट उतारने का प्रयास किया गया। सदर विकास खंड के पूरे अंती गांव में एक प्रभावशाली व्यक्ति ने प्रधान का पर्चा दाखिल करने जा रहे चचरे भाई को पुलिस की मिलीभगत के चलते अवैध असलहा रखने के आरोप में चालान करा दिया। हर गांव में इस तरह का माहौल बना हुआ है। अगर मतदान के पहले पुलिस ने ठोस पहल नहीं की, तो खूनी संघर्ष से इनकार नहीं किया जा सकता है। अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी दिनेश कुमार सिंह ने स्वीकार किया कि गांवों में प्रधानी के चुनाव को लेकर खींचतान मची हुई है। पुलिस के संज्ञान में जो भी मामले आ रहे हैं, उस पर कार्रवाई हो रही है।